*रवि गेंड्र।

बेमेतरा। हमें अपने ही बच्चों से सीख सीखनी चाहिए। कहते हैं, बच्चे मन के सच्चे व ईश्वर का स्वरूप माना जाता है। आपको बता दूं कि बच्चे मन मैं कोई बात देर तक छुपा कर नहीं रख सकता है। ऐसा ही बात एक छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के श्री पब्लिक स्कूल के विद्यालय में एक शिक्षक के द्वारा नेकी की दीवार की बात बच्चों को बताएं, जहां नेकी करना हो तो कुछ अच्छा करो, बच्चों को अध्यापक द्वारा बातें बताई गई थी। जिसमें बच्चों ने बाल दिवस के शुभ अवसर पर यह निर्णय लेकर अपने स्तर में जरूरतमंद लोगों को सहयोग करने की ठानी और नेकी करने निकल पड़े।

बच्चे अपने-अपने घरों से घर में रखे पुराने कपड़े को स्कूल लेकर पहुंच गए और कहने लगे कि हमें नेकी की दीवार के पास ले चलो हम अपने साथ कुछ पुराने स्वच्छ और सुंदर कपड़े लेकर आए हैं जिन्हें हम नहीं पहन पाते हैं उसे हम नेकी की दीवार में टांग आएंगे जिससे हमारे नगर के जरूरतमंद लोगों को मिल पाए। इस बात को सुनकर बच्चों के पालकों उनके गुरुजनों में खुशी के आंसू छलक आए और एक कदम जरूरतमंद लोगों के लिए नेकी करने के हौसले बढ़ाते हुए अपने नौनिहालों को आशीर्वाद भी दिए।

नेकी की दीवार ने लोगों को एक प्रेरणा का मिसाल कायम कर बेमेतरा जिला ही नहीं वरन पूरे देश को इस तरह कितने की कहा लोगों को बढ़ाना चाहिए। देश की उन्नति तभी होगा जब आप भेदभाव मिटाकर इंसान की जीवन की जिंदगी बसर करें और औरों को भी प्रेरित करें। आपको बता दूं कि नेकी की दीवार बेमेतरा कि शान है जहां लोग अपने पुराने स्वच्छ कपड़े को दीवाल में टांग आते हैं जहां से जरूरतमंद लोग वहां से ले जाते हैं यह सिलसिला लोगों को काफी प्रेरित कर रहा है।
जावेद अख्तर

यह दीवार सिटी कोतवाली थाना बेमेतरा एसडीओपी कार्यालय के पास वह मुख्य मार्ग से लगा हुआ है। आज की स्थिति में बेमेतरा नेकी की मिसाल गढ़ दिया। आपको बता दूं कि बेमेतरा में इस पावन भूमि में किसी भी परिचय देने की जरूरत नहीं है। आज की स्थिति में बेमेतरा जिला नेकी की मिसाल हमेशा बढ़ता ही आ रहा है जहां इंसान को इंसानियत का सिर्फ फ़िक्र रेहता है बस हम आप मिलकर नेकी की दीवार पर अपने पुराने स्वक्ष कपड़े लाकर जरूरतमंद लोगों के लिए रखें और एक कदम स्वच्छता के साथ साथ इंसान को इंसान की जरूरत के सामान दे।

साभार: scgnews.in

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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