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Chhattisgarh

एक और बड़ी खोज… The Hitavada का ताज़ा और तीखा एक्सक्लूसिव

महादेव सट्टा ऐप घोटाले में अब CBI की अगली बड़ी कार्रवाई की तैयारी, कुछ वरिष्ठ IPS “सरकारी गवाह” बनने की दौड़ में शामिल

मध्यभारत के सबसे विश्वसनीय और छत्तीसगढ़ के सबसे प्रतिष्ठित अंग्रेज़ी दैनिक The Hitavada ने एक बार फिर एक बड़ी खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की है। अख़बार के खोजी पत्रकार एवं समाचार संपादक मुकेश एस. सिंह की विशेष रिपोर्ट में यह सनसनीखेज़ खुलासा हुआ है कि CBI अब छत्तीसगढ़ के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर “अनुपातहीन संपत्ति” (Disproportionate Assets – DA) का अलग से आपराधिक मामला दर्ज करने जा रही है।

रायपुर : CBI ने हाल ही में Rs 6000 करोड़ के महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप सिंडिकेट की जांच के तहत दो दिवसीय छापेमारी अभियान चलाया था, जिसमें भारी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेज़ीय साक्ष्य बरामद हुए। इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि कुछ वरिष्ठ IPS, SPS और SAS अधिकारी अपने वैध और ज्ञात आय स्रोतों की तुलना में कहीं अधिक संपत्ति के स्वामी बन चुके हैं, जिसे उन्होंने न तो घोषित किया और न ही वैध तरीकों से अर्जित किया। ऐसे सभी प्रमाण अब “अनुपातहीन संपत्ति” के मामलों में दर्ज होने जा रहे प्रकरण का आधार बनेंगे।

CBI का न्यायिक अभियोजन प्रभाग (Directorate of Prosecution) इन सभी दस्तावेज़ों, संपत्ति घोषणाओं (IPRs), कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और डिजिटल मेटाडेटा की विधिसम्मत जांच कर रहा है। एक बार कानूनी समीक्षा पूर्ण होते ही DA के तहत अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर दी जाएगी।

72 घंटे तक लापता रहे ASP अभिषेक महेश्वरी, जो 2013 बैच के राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारी हैं, हाल ही में रायपुर स्थित एक पुलिस गेस्ट हाउस में CBI के जांच दल के समक्ष पेश हुए। CBI के जांच अधिकारियों ने उनसे BNSS की धारा 180 के तहत औपचारिक बयान दर्ज किया है। इस पूछताछ के बाद जांच की दिशा में नए सुराग मिले हैं।

वहीं दूसरी ओर, कुछ वरिष्ठ IPS अधिकारी अब “सरकारी गवाह” बनने की दौड़ में शामिल हो गए हैं, लेकिन CBI उनके शुरुआती सहयोग से असंतुष्ट रही है और केवल ठोस सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि दो वरिष्ठ IG रैंक के IPS अधिकारियों को, जिनके खिलाफ पहले ही छत्तीसगढ़ सरकार की सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा Section 17(A) के अंतर्गत अभियोजन स्वीकृति दी जा चुकी है, CBI की हालिया छापेमारी में शामिल नहीं किया गया। सूत्रों के मुताबिक़ ये दोनों अधिकारी फिलहाल CBI की सघन निगरानी में हैं और संभवतः उन्हें जल्द ही समन भेजा जाएगा।

The Hitavada की यह रिपोर्ट एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि खोजी पत्रकारिता के क्षेत्र में अख़बार की विश्वसनीयता, पहुंच और विवेक पूरे प्रदेश में सबसे आगे है।

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