“आयुष्मान भव स्वाहा…!”

सुकमा। ग्रामीण इलाकों में लोक स्वास्थ्य की गंभीरता को यह एक ही वक्त की दो तस्वीर स्पष्ट करती है। पहली तस्वीर को जरा जूम कर गेट पार भी झाँकिये और स्पष्ट न हो तो उसकी फिर दूसरी स्पष्ट तस्वीर देख लीजिये।
सुकमा जिले के रहवासी राजेश नाग जी ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवस्थित ग्राम-कुकानार के हॉस्पिटल की यह तस्वीर और खबर कल देर रात हमारे साथ शेयर किया, उनके मुताबिक कल 3 बजे के बाद तक भी। हॉस्पिटल नहीं खुला और एक्सीडेंट में घायल और एक मरीज को प्रारंभिक/प्राथमिक इलाज के लिये हॉस्पीटल के दर पर किस तरह तड़पते पड़े रहना पड़ा होगा।
संजीदा हो; लिखते हुये मुझे हॉस्पिटल बंद रहने की वजह नहीं मालूम है, यदि जायज वजह से बंद भी हो तो लोक स्वास्थ्य हित में सुधार लाते 24×7 की व्यवस्था, सेट-अप सुनिश्चित किया जाना चाहिये। गंभीर स्थिति की 5 लाख का आयुष्मान हो या नवसृजन 20 लखिया योजना जब मिले तब मिले, पर कम से कम प्राथमिक उपचार के लिये तो हॉस्पिटल के गेट 24 घंटे व्यवस्था में खुले रहें, यह सुनिश्चित होना चाहिये।
जगदलपुर से कोंटा राष्ट्रीय राजमार्ग 200 किमी लंबाई में कुछ प्रमुख स्थानों पर प्राथमिक या सामुदायिक हॉस्पिटल (दरभा, कुकानार, छिंदगढ़, सुकमा जिला अस्पताल, दोरनापाल, कोंटा) हैं, सड़क के दोनों किनारे सैकड़ों गाँव, कई दुर्गम गाँव मितानिनों, MPHW की छाँव में कुछ अधिक बेहतर की आस में इन्हीं हॉस्पिटल्स के भरोसे हैं, और वहाँ ऐसे हालात हों, तो बहुत ही चिंतनीय है ।
डॉक्टरों की कमी से जूझते या अदद डॉक्टरों की आस लिये क्षेत्रों के हॉस्पिटल में 24 घंटे डॉक्टर की उपलब्धता न सही लेकिन 24 घंटे चाक-चौबंद शेष मेडिकल असिस्टेंस सेटअप भी दुरुस्त रख दिया जावे तो हेल्थ एंड वेलनेस के थोड़े नहीं बल्कि ढेरों समस्याओं से निजात मिल जायेगा….. आशा है, नीति-नियंताओं तक यह बात पहुंचेगी और इस दिशा में अविलंब कार्य होगा।

*हेमंत बस्तरिहा के फेसबुक वॉल से तस्वीर/सूचना साभार- राजेश नाग जी”

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