गलती बैंक प्रबंधन की औऱ सज़ा हितग्राही भुगतने को मजबूर

स्टेट बैंक लैलूंगा प्रबन्धन की लापरवाही और तुगलकी आचरण के कारण पीड़ित हितग्राही गुप्ता परिवार मुख्यालय में अनशन पर

प्रबन्धन ने 60 दिनों में जमा होने वाली सब्सिडी की राशि लगभग सवा 5 लाख रु.को 5 साल बाद जमा कराया,अब उस पर 6 लाख रु ब्याज अलग मांग रहे हैं।

*नीतिन सिन्हा

रायगढ़।  एक आम आदमी के लिए सरकारी बैंकों से ऋण लेकर व्यवसाय करना कितना कठिन है, इस बाद का प्रमाण देने वाली एक शर्मनाक घटना प्रकाश में आई हैं। जो लैलूंगा स्टेट बैंक प्रबन्धन से जुड़ी है। प्रबन्धन की गम्भीर लापरवाही और अशिष्ट व्यवहार से प्रताड़ित होकर लैलूंगा निवासी गुप्ता परिवार को आज दिनांक 15 अप्रैल 2019 को जिला मुख्यालय रायगढ़ में भरी दोपहरी जिला कलेक्ट्रेट के सामने घर की दो महिलाओं दो छोटे-छोटे बच्चों के सांथ अनशन पर बैठ गया।
अनशन में अनिरुद्ध गुप्ता और पीड़ित परिवार
पीड़ित गुप्ता परिवार से प्रेस ने आचार संहिता के बीच अनशन पर बैठने की वजह जानी तो उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक प्रबंधन की लापरवाही का हर्जाना उनसे जबरन क्यों वसूलने का दबाव बनाया रहा है.? स्टेट बैंक मैनेजर लैलूंगा हमारी कुछ भी सुनने को तैयार नही है। ऐसी हालात में हमारे पास अनशन में बैठने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नही बचा है।
घटना के सम्बंध में विस्तार से बताते हुए अनिरुद्ध गुप्ता ने कहा कि उन्होंने pmegp योजना के अंतर्गत स्टेट बैंक लैलूंगा से करीब सात साल पहले लोन लिया था। लोन लेते समय बैंक ने हमारी सम्पत्ति भी गिरवी भी रखी थी। योजना के अंतर्गत हितग्राही को शासन की तरफ से यह लाभ मिलता है कि लोन की राशि का 75 प्रतिशत रकम ही निर्धारित ब्याज सहित भरना होता है। शेष 25 प्रतिशत राशि पर शासन की सब्सिडी मिलती है। यह रकम बैंक को क्लेम करके निर्धारित 60 दिनों में लेना होता है। परन्तु लैलूंगा स्टेट बैंक शाखा ने विगत 5 साल तक सब्सिडी की राशि लोन खाते में जमा नही कराई, फिर जब जमा कराई तो सब्सिडी की राशि पर 15 प्रतिशत ब्याज जोड़ कर 6 लाख रु अतिरिक्त मांग रहे है। हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण लोन की राशि मे इतनी रकम नजायज तरीके से जोड़ा जाना हमारे लिए तकलीफ दायक है। बैंक की इस लापरवाही से हमारे पूरे परिवार का भविष्य संकट में है। ऊपर से हमारे परिवार की एक मात्र सम्पत्ति भी बैंक के पास गिरवी है जिसका बाजार मूल्य 35 से 40 लाख रुपये होगी। अब आप ही बताये हम लैलूंगा स्टेट बैंक से लोन में ली हुई रकम का 75 प्रतिशत भाग मय ब्याज पटाने को तैयार है। हमने बैंक में लोन की रकम का बड़ा हिस्सा पटा भी दिया है। स्वीकृत लोन की यह राशि लगभग 19 लाख रु हमने वर्ष 2012 में लिया था। आज की परिस्थियों में लोन की राशि मे एक से डेढ़ लाख रुपया ही पटाना बचा है…
स्टेट बैंक के नोडल ब्रांच की गलती का खामियाजा हमे भरने को मजबूर किया जा रहा है : अनिरुद्ध गुप्ता

तपती दोपहरी में जब शहर का पारा अपने पूरे शबाब पर रहा होगा तब परिवार की महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों के सांथ किसी व्यक्ति का अनशन में बैठना बेहद पीड़ा दायक निर्णय था। अनशन में बैठे परिवार पर जब प्रेस कर्मियों की नजर पड़ी तो उनसे रहा नही गया। पीड़ित गुप्ता परिवार ने आप बीती बताते हुए कहा कि उन्होंने बैंक से लोन में ली हुई रकम को समय पर चुकता किया है। इन हालात में उन्हें प्रोत्साहन मिलने के बजाए बैंक प्रबंधन अपनी गलती का हर्जाना लगभग 6 लाख रु हमसे अनावश्यक वसूलने को तत्तपर है। सब्सिडी की रकम जो हर हाल में लोन प्राप्ति के 60 दिनों के भीतर बैंक को शासन के तरफ से मिल जाती है। इसके लिए स्टेट बैंक का नोडल ब्रांच रायपुर कार्रवाही करता है। उन्होंने समय पर अपनी जिम्मेदारी नही निभाई तो हमसे लाखों रु ब्याज की रकम वसूलना कहाँ तक जायज है। हमारी माली हालत बेहतर होती तो हम बैंक से लोन लेकर काम थोड़ी करते। हमने बैंक के मैनेजर से लेकर बड़े अधिकारियों तक को आवेदन दिया है। कहीं सुनवाई न होने पर जिला कलेक्टर रायगढ़ को भी एक सप्ताह पहले आवेदन देकर अपना पक्ष रखा था उनसे यह भी कहा था कि वे समय रहते कार्रवाही नही करेंगे तो मजबूरन उन्हें जिला कलेक्ट्रेट के सामने सपरिवार अनशन पर बैठना पड़ेगा। आज हम उसी प्रक्रिया में अपनी मांग को लेकर अनशन ओर बैठे हैं। प्रेस कर्मियों ने पीड़ित परिवार के सम्बंध में अनशन स्थल पर ही कलेक्टर रायगढ़ को फोन पर जानकारी देते हुए पहल की अपील की। जिस पर संवेदनशील कलेक्टर ने अपने मातहत अपर कलेक्टर को अनशन स्थल पर भेजा जिन्होंने पीड़ित परिवार की बात धैर्य से सुनी और उन्हें समझाया कि आचार संहिता के बीच वे अनशन न करें,प्रशासन पर भरोसा रखें चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होते ही आपके आवेदन पर स्टेट बैंक लेंलूँगा और आपको बुला कर समस्या का समाधान करेंगे। .
प्रशासन की समझाइस पर पीड़ित परिवार ने शाम करीब 5 बजे अनशन तोड़ा और वापस लैलूंगा लौट
शाम करीब 4 बजे कलेक्टर रायगढ़ की पहल से जिला प्रशासन से अपर कलेक्टर ने अनशन रत परिवार को आचार संहिता के बाद उपयुक्त कारवाही का आश्वासन देते हुए समझाइस दी,जिसके बाद प्रेस कर्मियों की उपस्थिति में अनशनरत गुप्ता परिवार ने अनशन तोड़ते हुए धरना स्थल से वापस अपने घर चले गए।..
क्या कहते है विशेषज्ञ : गुप्ता परिवार की समस्या को लेकर हमने पूर्व बैंक अधिकारी और बैंकिंग मामलों के विशेषज्ञ कमलेश प्रसाद सिन्हा से चर्चा की तो उन्होंने सीधे तौर पर सब्सिडी के इस विवाद को लेकर स्टेट बैंक प्रबन्धन को दोषी बताया। उनका कहना था कि  “शासकीय योजनाओं के तहत मिलने वाले लोन में सब्सिडी की राशि खाते निर्धारित समयावधि में जमा कराने की जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की होती है। वह लेट जमा होने वाली राशि पर ब्याज की मांग सही मायनों में नही कर सकते। पीड़ित को बैंक प्रबंधन के विरुद्ध लोकपाल और उच्चाधिकारियों से बात करना चाहिए। उन्हें निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा।
वहीं पूरे प्रकरण को लेकर स्टेट बैंक प्रबंधक लेंलूँगा का कहना था कि अनिरुद्ध गुप्ता मामले में वो प्रेस को कुछ नही बता सकते,जब उनका लोन स्वीकृत हुआ था तब वो अन्यत्र पदस्थ थे। आपको जो भी जानकारी लेनी है आप नोडल शाखा रायपुर से ले लीजिए।

By Soni Smt. Sheela

सम्पादक : प्रचंड छत्तीसगढ़, मासिक पत्रिका, राजधानी रायपुर से प्रकाशित। RNI : CHHHIN/2013/48605 Wisit us : https://www.pc36link.com

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