रायपुर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत होने के साथ ही नित जारी हो रहे नये – नये फरमानों. से समिति कर्मी व किसान हलाकान हो चले हैं व उनमें आक्रोश पनप रहा है। इन फरमानों के चलते किसानों व कर्मियों के बीच विवाद भी शुरु हो चला है। पच्चीस सौ रुपये प्रति क्विंटल धान की खरीदी का वादा कर सत्तासीन दल द्वारा इस वर्ष समर्थन मूल्य व वादे के बीच के अँतर की राशि को बीते वर्ष की भाँति इस साल एक मुश्त न दे इस अंतर की राशि को देने की प्रक्रिया तय करने समिति गठन किये जाने से इस राशि के न मिलने की आशंका से ग्रसित किसानों का एक वर्ग जहां इसे अंतर की राशि भुगतान कर पाने मे अपनी असफलता को छिपाने कम से कम धान खरीदने की नीयत से शासन द्वारा डाले जा रहे सुनियोजित अड़ंगा ठहरा रहा है तो दूसरा वर्ग धान खरीदी मे आने वाले व्यवहारिक दिक्कतों से अनभिज्ञ अधिकारियों की करतूत ठहरा रहा है। किसान किसान संघर्ष समिति का कहना है कि इस अव्यवहारिक फरमानों के पीछे कारण चाहे जो भी हो पर इसे वापस नहीं लिया गया तो सत्ताधारी दल के राजनैतिक सेहत बिगड़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

प्रति किसान धान लाने टोकन की सँख्या 5 से घटा 3 किये जाने, प्रतिदिन धान खरीदी की सीमा तय करने, प्रत्येक किसान द्वारा लाये जाने वाले धान का पहले ढेरी लगवा फिर तौल करवाने, धान लाने वाले किसानों को हरेक बार व्यक्तिगत रुप से उपस्थित रहने, धान के प्रकार के अनुसार अलग-अलग स्टेक बनाने, सूखती की क्षतिपूर्ति समितियों को न दे सिर्फ संग्रहण केन्द्रों को देने, नये व पुराने बोरे के अनुपात मे परिवर्तन करने व किसानों के पीठ पीछे रकबा कम किये जाने को ले कर्मियों व किसान हलाकान होने के साथ – साथ आक्रोशित भी हो चले हैं। किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा का कहना है कि समितियों द्वारा किसानों से चर्चा पश्चात औसतन प्रतिदिन 2000 से 2500 कट्टा धान खरीदा जाता रहा है जिसे घटा अचानक औसतन 1000 कट्टा के आसपास कर दिया गया है जबकि अधिकांश समितियों मे इस फरमान के पहले जनवरी माह तक के लिये टोकन जारी किया जा चुका है। इसी तरह पूर्व मे किसानों को 5 टोकन प्राप्त करने का अधिकार था जिसे अचानक घटा 3 कर दिया गया है। शर्मा के अनुसार किसान उपलब्ध सुविधा के अनुसार मिसाई कर कई किश्तों मे धान समितियों मे लाते है और कई किसान 3 टोकन प्राप्त कर धान ला चुके हैं और शेष लाना बाकी है।

इस स्थिति मे और दो टोकन की सुविधा न मिलने पर किसान धान बेचने से वँचित हो जाएंगे। प्रतिदिन धान खरीदी की सीमा तय किये जाने के फरमान को भी अव्यवहारिक ठहराते हुये श्री शर्मा का कहना है कि कई बार धान का परिवहन न हो जाम हो जाने, हमालों की कमी, असामयिक बरसात सहित अन्य और कारणों से धान खरीदी संभव नहीं हो पाता और फिर हमालों की रोजी भी देखना पडता है। तय किये गये सीमा का पालन करने पर तो 25 से 30 प्रतिशत धान की खरीदी ही नहीं हो पावेगा और इसके अतिरिक्त वर्तमान मे टोकन पा चुके किसानों को पुनः धान वापस ले जाने की स्थिति पैदा होगी जिसके चलते कर्मियों व किसानों के बीच रोज टकराव की नौबत आने के साथ – साथ किसानों को अनावश्यक व्यय व परेशानियों का सामना करना पडेगा। प्रत्येक किसान द्वारा लाये जाने वाले धान को पहले ढेरी लगवा फिर खरीदने के फरमान को भी अव्यवहारिक ठहराते हुये शर्मा ने कहा है कि अधिकांश धान उपार्जन केन्द्रों मे सीमित जगह है और ढेरी लगा खरीदने से जहाँ जगह की समस्या आवेगी वहीं धान खरीदी मे भी विलंब होगा जबकि पूर्व मे रेंडम पद्वति से धान खरीदी की व्यवहारिक नीति रही है।

धान का अलग-अलग स्टेक लगाने संबंधी फरमान को भी अव्यवहारिक बतलाते हुये उन्होंने जानकारी दी कि पूर्व मे मोटा, पतला व सरना धान का स्टेक बनाया जाता था पर अब एच एम टी धान के अलग – अलग किस्मों का भी अलग-अलग स्टेक लगाने का फरमान जारी किया गया है जबकि इस धान के ही 4 – 5 किस्म है और जगह की कमी के चलते ऐसा कर पाना भी व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है क्योंकि ऐसा करने पर धान खरीदी हेतु जगह नहीं बचेगा। धान बेचने हर बार किसान की व्यक्तिगत उपस्थित के फरमान की भी आलोचना करते हुये उन्होंने कहा है कि कई किसान सुदूर नौकरीपेशा है और उसके परिवार के सदस्य खेती करते हैं ऐसी स्थिति मे जबकि उसके पूरे रकबा, ऋण राशि व बैंक खाता की जानकारी समिति के पास है किसान की मौजूदगी का फरमान मात्र किसानों को परेशान करने की नीयतवाला महसूस होता है। सूखती की भरपायी भी समितियों को न कर मात्र संग्रहण केन्द्रों को देने की भी नीति का आलोचना करते हुये उन्होंने कहा है कि या तो निर्धारित 72 घंटे के भीतर शासन परिवहनकर्ता से धान का उठाव करवा ले या फिर सूखती की भरपायी सम्बंधित समितियों को करे क्योंकि कोई भी समिति सूखती का हानि उठाने सक्षम नहीं है। किसानों के रकबे मे भी उनके पीठ पीछे कमी किये जाने की जानकारी किसानों को धान लेकर पहुंचने पर मिलने से इस मसले पर भी किसानों का आक्रोश शनैः शनैः भडकने की जानकारी देते हुये उन्होंने शासन से जारी अव्यवहारिक फरमानों के औचित्य पर तत्काल पुनर्विचार कर व्यापक किसान हित मे वापस लेने का आग्रह किया है।

“किसान संघर्ष समिति” के संयोजक श्री भूपेन्द्र शर्मा के वक्तव्य का समर्थन श्री ब्रम्ह ऋषि सेवा संस्थान, चम्पारण रायपुर (छ.ग.) की सचिव शशि बहन ने करते हुए शासन से तत्काल उचित निर्णय जारी करने का मांग की है।

जै किसान जै जोहार।

By Soni Smt. Sheela

सम्पादक : प्रचंड छत्तीसगढ़, मासिक पत्रिका, राजधानी रायपुर से प्रकाशित। RNI : CHHHIN/2013/48605 Wisit us : https://www.pc36link.com

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