सुनील महापात्र

सरायपाली। प्रदेश के शिक्षाकर्मियों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है और इस बार यह झटका जांजगीर-चांपा के उन शिक्षाकर्मियों को लगा है जिन्हें कुछ ही दिनों पहले आदेश जारी करके क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ दिया गया था जिसके चलते शिक्षाकर्मियों में खुशी की लहर छा गई थी, लेकिन उनकी यह खुशी उस समय काफूर हो गई जब पूर्व में जारी उक्त आदेश को रद्द करते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी जैजैपुर ने उप कोषालय को पत्र जारी करते हुए अधिक भुगतान की वसूली करने कह दिया है।

ज्ञात हो कि ऐसी ही घटना दंतेवाड़ा में भी हुई थी। वहां भी जनपद पंचायत के सीईओ ने क्रमोन्नत वेतनमान देने का आदेश जारी कर दिया था और फिर बाद में उसे रद्द कर दिया था।

दरअसल क्रमोन्नत वेतनमान का पूरा पेंच उन शिक्षाकर्मी नेताओं के इर्द-गिर्द फंसा हुआ है जो इसकी आड़ में जमकर राजनीति कर रहे हैं और अपने ही शिक्षाकर्मी साथियों को गुमराह कर रहे हैं। विभाग के कई आदेशों से यह एकदम स्पष्ट हो चुका है की शिक्षा विभाग शिक्षाकर्मियों के संविलियन होने की तिथि से उनकी सर्विस की गणना कर रहा है और ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग के फिलहाल क्रमोन्नत वेतनमान देने के कोई आसार ही नही है और अगले 10 साल के बाद ही क्रमोन्नत वेतनमान शिक्षक एलबी संवर्ग को मिलेगा।

इधर पंचायत विभाग 2011 में जारी किए गए अपने क्रमोन्नत वेतनमान के आदेश को 2013 में निरस्त कर चुका है इसके चलते शिक्षाकर्मियों को पंचायत विभाग से भी लाभ नहीं मिल सकता। लाभ मिलने के लिए उस दौर के क्रमोन्नत आदेश को फिर से लागू करना पड़ेगा जो अब पंचायत विभाग करने से रहा।

इसका सीधा सा मतलब है कि यदि सरकार इस विषय पर कोई सीधा निर्णय लेते हुए नया आदेश जारी करती है और भूतलक्षी प्रभाव से शिक्षाकर्मियों को पंचायत विभाग की सर्विस के दौरान क्रमोन्नत वेतनमान देने का आदेश जारी करती है तभी जाकर शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नत वेतनमान मिल सकता है अन्यथा किसी कीमत पर नहीं।

दरअसल प्रदेश में शिक्षाकर्मियों के बीच क्रमोन्नत वेतनमान एक बड़ा मुद्दा है और ऐसे में अलग-अलग संगठन इसे समय-समय पर भुनाते आ रहे हैं। एक संगठन ने जहां क्रमोन्नत फॉर्म भरवाने के नाम पर जमकर चंदा वसूली की वहीं अब कुछ लोग सामने आकर न्यायालय में याचिका दायर करने के नाम पर ऐसे ही काम में जुट गए हैं जबकि अब तक सैकड़ों याचिकाएं उच्च न्यायालय में क्रमोन्नति के लिए दायर हो चुकी है और सभी में एक ही आदेश आया है कि याचिकाकर्ता विभाग के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करें और इस अभ्यावेदन को भी विभाग द्वारा रिजेक्ट किया जा चुका है ऐसे में शिक्षाकर्मी कहीं न कहीं अपने ही लोगों के द्वारा ठगे जा रहे हैं और हर बार थोड़ी देर के लिए मिलने वाली खुशी के बाद उन्हें तोड़ देने वाले गम के रूप में नसीब हो रही है।

By Soni Smt. Sheela

सम्पादक : प्रचंड छत्तीसगढ़, मासिक पत्रिका, राजधानी रायपुर से प्रकाशित। RNI : CHHHIN/2013/48605 Wisit us : https://www.pc36link.com

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