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वो बेचारा श्राप के डर से काँपता हुआ बाहर निकल गया और उन्होंने अपने नौकरों को व्हीलचेयर लाने का इशारा किया और ‘आह…आह’ करते हुए व्हीलचेयर पर बैठ गयी।

*भोपाल। विवादित बयानों के लिए मशहूर बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ने अब एक और नया बयान दे दिया है, जिस पर हंगामा मचना शुरु हो गया है। प्रज्ञा ठाकुर ने अपना काम कराने आये एक व्यक्ति से कह दिया कि मोदी के नाम पे वोट दिया है तो मोदी से ही काम कराओ …
“जाओ मोदी से ही कराओ अपना काम”
यह बयान साध्वी प्रज्ञा ने अपने जनता दरबार में दिया, जब लोग उनके सामने अपनी समस्याएँ रख रहे थे। एक व्यक्ति ने जब अपनी गली में लगे कूड़े के ढेर को हटवाने की रिक्वेस्ट की तो; प्रज्ञा ने पहले तो उसे ऊपर से नीचे तक घूरकर देखा और फिर पूछा- “वोट किसके नाम पर दिया था?”
व्यक्ति डरते-डरते बोला – “मोदीजी के नाम पर”; “तो जाओ मोदी के पास, उन्हीं से कराओ साफ़-सफ़ाई… यहाँ क्या लेने आये हो ?”  प्रज्ञा ने ग़ुस्से से बाहर की ओर इशारा करते हुए कहा। वो बेचारा श्राप के डर से काँपता हुआ बाहर निकल गया।
फिर वो बाक़ी लोगों की तरफ़ घूमीं और बोलीं- “तुम में से जिस किसी को भी अपना काम कराना है, वो सीधे मोदीजी के पास जाये क्योंकि तुम लोगों ने वोट भी सीधे मोदीजी को ही दिया था। याद रखो, मैं यहाँ तुम लोगों के काम कराने नहीं आयीं हूँ, मैं एक सीक्रेट काम करने आयी हूँ और उसे पूरी ईमानदारी से कर रही हूँ।”
यह कहकर उन्होंने अपने नौकरों को व्हीलचेयर लाने का इशारा किया और ‘आह…आह’ करते हुए व्हीलचेयर पर बैठ गयीं और हाथ जोड़ते हुए अंदर चली गयी।

(उपरोक्त वीडियो प्रतीकात्मक रूप से लिया गया है)

*साभार : फेकिंग न्यूज।

 

 

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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