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कश्ती जलाकर शुर्ख वो तारीख़ हो गए, हमने वतन के वास्ते क्या क्या नही किया..?

ईमानदारी का इनाम।
उत्तर प्रदेश के डीजीपी रहे जावेद अहमद का नाम सीबीआई निदेशक के लिए सबसे आगे था लेकिन उन्हें डीजीपी नही बनाया गया क्योंकि जावेद अहमद ने ट्रेज़र गन की गोलियां किसी दूसरे व्यक्ति पर चलाने से पहले ख़ुद पर चलाकर बहादुरी का सबूत दिया था, ट्रेज़र गोली एक ऐसी गोली है जिसके लगने से आदमी कुछ देर के लिए बेहोश हो जाता है उसकी जान को कोई नुक़सान नही पहुंचता है, यह गोली दंगे में भीड़ को काबू करने के लिए बनाई गई थी, इस गोली को जावेद अहमद ने सबसे पहले ख़ुद के ऊपर इस्तेमाल किया जिसके बाद डीजीपी बेहोश हो गए थे, अब जावेद अहमद का नाम सीबीआई चीफ़ की दौड़ में सबसे ऊपर था लेकिन उन्हें नही बनाया गया, जावेद के डीजीपी ना बनने पर उन्होंने एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में विचलित टिप्पणी की है, आईपीएस ऑफिसर के नाम से बने ग्रुप में जिसमें 250 के करीब अधिकारी है, किसी अधिकारी ने जावेद अहमद से उनके डीजीपी ना बनने की वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि “अल्लाह की मर्ज़ी, बुरा तो लगता है लेकिन M (मुसलमान) होना गुनाह है।”
सोचिए काफ़ी देर तक सोचिए कि एक ऑफिसर को देश की सत्ता ने एहसास करा ही दिया कि तेरा मुस्लिम होना इस देश मे गुनाह है।
अब सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला को बनाया गया है, ऋषि कुमार शुक्ला को इसलिए सीबीआई निदेशक बनाया गया क्योंकि साल 2016 में भोपाल की केंद्रीय कारागार से लकड़ी की चाबी से जेल का ताला तोड़कर भागे 8 युवक जिनको सिमी का आतंकवादी क़रार देकर एनकाउंटर में मार दिया गया उस वक़्त शुक्ला मप्र के डीजीपी थे, उन एनकाउंटर पर काफ़ी सवाल खड़े हुए कि लकड़ी की चाबी से ताला कैसे खोला जा सकता है ? जेल तोड़कर भागने के तुरंत बाद ही उनके पास हथियार कहा से आ गए ? जब उनकी तरफ़ से भी पुलिस पर फायरिंग हुई तो पुलिस वीडियो में उनके पास खड़े होकर गोली चलाती हुई कैसे दिखाई दे रही है ? खैर शुक्ला इन सभी सवालों को तोड़-मरोड़ कर एनकाउंटर को सही साबित करने में कामयाब हो गए, इसलिए शुक्ला को साफ़ छवि वाला अधिकारी क़रार देकर सीबीआई निदेशक बना दिया गया है, लेकिन जावेद अहमद के मुस्लिम होने पर दुःख जताना दर्शाता है कि मुस्लिम से इस देश की सभी सत्ताओं को चिढ़ रही है, किसी सरकार ने मुस्लिम को भाई समझकर कलेजे से लगाने की कोशिश नही की, आख़िर कब तक मुस्लिमो के साथ भेदभाव चलता रहेगा ? अखिलेश यादव भी नही चाहते थे कि यूपी का डीजीपी जावेद अहमद जो कि मज़हब से मुस्लिम है बने।

*नईम अख्तर के फेसबुक वॉल से साभार।

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