EditorialStay-Awake

पुलिस रिफॉर्म की दरकार। लेकिन बेपरवाह है सरकार…

देश में अगर सबसे भयानक रुप में किसी महकमे को देखा जाता है तो वह है पुलिस महकमा। लेकिन आखिर इतनी विषम परिस्थितियों में चौबीसों घंटे की खतरनाक नौकरी बजाने के बाद भी देश में पुलिस इतनी उपेक्षित क्यों है? इस तथ्य की ओर शायद ही किसी ने ध्यान दिया हो। हालांकि इस विषय पर देश में समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन देश की राजनीति में ऊंचे पदों पर बैठे राजनेताओं ने पुलिस महकमे के इस दर्दनाक जख्म पर शायद ही ईमानदारी से मरहम लगाने की सोची हो, जबकि यह बात जगजाहिर है कि, पुलिस महकमे की इस विवादास्पद कार्यशैली के पीछे जो सबसे बड़ा कारण है उसका अपना बूढ़ा हो चुका जर्जर पुलिस कानून है ? ब्रिटिश शासनकाल सन् में स्थापित पुलिस कानून आज तक घसीटा जा रहा है शायद बहुत कम लोग इस कटु सत्य से वाकिफ होंगे कि आज देश के हर नागरिक से जुड़े हमारे पुलिस कानून की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में सन् 1857 के गदर के बाद स

Read More
Editorial

घृणित मानसिकता की परिणीति, माँब लीचिंग

पूर्वाग्रह से ग्रसित और द्वेषभावना पोषित, पांच पच्चीस लोंगो का समूह, अपनी नफरत की आग से अक्सर निर्दोष, निरीह व्यक्तियों को दग्ध कर रहा है। घृणित मानसिकता वाले कुछ लोंगो के द्वारा दुष्प्रचार और अफवाह फैला कर भीड़ के सहारे अपने मनोविकार और दुर्भावना को संतुष्ट करने ऐसे निरीह लोगों को चुना जाता है जो अपने घर, गांव, गृहनगर से सैकड़ो किलोमीटर दूर के होते हैं तथापि घटना स्थल के आस पास ना इनकी कोई पहचान होती है और ना कोई पहचानने वाला। ये जरूरी नहीं की माँब लीचिंग अर्थात भीड़ द्वारा पीट पीटकर इंसानो को मार डालने की घटना केवल एक वर्ग विशेष के साथ हो, नफरतों के देवता अपने उद्देश्यों की पूर्ति के मौके पर ना हिन्दू देखते हैं ना मुसलमान। कहि बच्चा चोरी और कहि गौवध को, अफवाह का आधार बनाया जाता है। भीड़ के सहारे, भीड़ के बीच विकृत मानसिकता वाले नफरतों के देवता स्वयं को वीरपुरुष सिद्ध करते लाठी पत्थर से लैस खु...

Read More
ChhattisgarhEditorial

सारकेगुड़ा : जिन्हें सींखचों में होना चाहिए; वो बाहर हैं ! और जिन्हें बाहर होना था वे कैद में।

रायपुर। *सारकेगुड़ा का सच सामने नहीं आ पाता, अगर छत्तीसगढ़ के मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज ना होती। महाराष्ट्र के पुणे जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज ही वो महिला है, जिन्होंने सारकेगुड़ा के पीड़ित ग्रामीणों की न्यायिक आयोग के सामने गवाही सुनिश्चित की। सारकेगुडा की ज़मीनी हक़ीकत को भांपते हुए सुधा भारद्वाज खुद बीजापुर गईं और ग्रामीणों की गवाही का इंतज़ाम कराया। उन्होंने 30-35 ग्रामीणों की गवाही को शपथपत्र के ज़रिए न्यायिक आयोग के पास जमा कराया। इसके लिए सुधा भारद्वाज को; न्यायिक आयोग को विश्वास दिलाना पड़ा कि ग्रामीणों तक सूचना नहीं पहुंच पाई थी, न ही उनके हालात ऐसे थे कि वो न्यायिक आयोग के पास बिना किसी की मदद के पहुंच सकते। कौन है सुधा भारद्वाज ? सुधा भारद्वाज एक मानवाधिकारों की कानूनी लड़ने वाली एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। सुधा करीब तीन दशक से छत्तीसगढ़ में क

Read More
communiqueEditorial

समस्यायें बनी रहे युग-युग जिए हमारे नेता, अधिकारी और पत्रकार।

समाज में जब समस्याएं ही नहीं होगी तब ये बेचारे हमारे नेता, अधिकारी, पत्रकार क्या करेंगे ? जब मरीज बढ़ेेंगे, तभी तो डॉक्टर की आवश्यकता पड़ेगी। जुल्म, अन्याय, दमन और उत्पीडऩ बढ़ेगा तभी तो न्यायाधीश, वकील और पुलिस अधिकारियों की जरूरत; समाज समझेगा, वरना ये बेचारे कहां जाएंगे ? कब तक बैठकर मक्खी मारेंगे...? जहां तक समस्या भ्रष्टाचार के उन्मूलन की है; हम सभी जानते हैं की देश के सबसे बड़े उद्योग रेल्वे में भ्रष्टाचार न होता तो सोने की पटरियां बिछ जाती। यही हाल बिजली विभाग का है देश में बिजली का अभाव नहीं। बिजली का बनावटी संकट केवल भ्रष्टाचार पर आधारित, दूषित व्यवस्था की देन है जिसके भ्रष्ट अधिकारी - नेता ही जिम्मेदार है। यूपी में बिजली संकट के पिछे सिर्फ लूुट जिम्मेदार है। बिजली चोरों की चांदी कट रही है, परेशानी में केवल वास्तविक ईमानदार उपभोक्ता है जो महंगी बिजली खरीदकर नियम से बिल पटाते हैं फ

Read More
ConcernEditorial

रोते रहिए, ज़ाहिद सरसब्ज़ होते रहेंगे। ट्वींकल, तेरी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के हकदार भी नहीं हैं हम…

यह मेरी मानसिक कायरता थी कि मैं टप्पल, अलीगढ़ की ट्वींकल शर्मा पर लिखने की हिम्मत नहीं जुटा सका था। ढाई वर्षीया मासूम ट्वींकल शर्मा के साथ ज़ाहिद खां ने जो किया... उसको लिखते कलम लरजती... कांपती है... शरीर मे रक्तप्रवाह बढ़ जाता है ... आंखे नम हो जाती हैं... ढाई वर्ष की ट्वींकल शर्मा पर रोने वाला कोई नहीं !....अखलाख की हत्या पर सैकड़ों लोग... नेता बिसरख में जुट गए थे !... मुआवजे में कई फ्लैट मिले... नौकरियां मिली... नकद करोड़ों मिले... ट्वींकल के घर वाले लापता ट्वींकल की तलाश में 30 घण्टे प्रशासन के सामने माथा रगडते रहे.. जवाब मिला था.. "खुद ही ढूंढ लो...." कुछ माह पूर्व जब ज़ाहिद के पिता बीमार हुए तो ट्वींकल के पिता/दादा बनवारी लाल ने ज़ाहिद को रु 50000 इलाज हेतु सहायता दी थी। ज़ाहिद ने जल्द ही लौटा देने का वायदा किया... अनेक बार तकादा करने के बाद ज़ाहिद ने सिर्फ 40000 रु वापस किये... लेकिन 1000

Read More
Editorial

हार्वर्ड बनाम हार्ड वर्क।

आप 2011 के अन्ना आंदोलन से लेकर वर्तमान तक का सफर तय कीजिये। इस दरम्यान आपको भारत की राजनीति और मीडिया की मिलीभगत का सबसे घिनौना स्वरुप दिखेगा ! इतना घिनौना कि 10 साल से देश की सत्ता पर काबिज राजनीतिक दल को 44 सीटों पर लाकर पटक दिया...! CAG,CBI, ED, Indian Army के चीफ से लेकर बाबा रामदेव, अन्ना हजारे, केजरीवाल, किरण बेदी, उज्जवल निकम जैसे धुरंधरों ने देश में ऐसा माहौल बनाया जैसे कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार इस सदी की भ्रष्टतम सरकार है। घोटाले, मंत्रियों के इस्तीफे, गिरफ्तारियां, आंदोलन, धरना-प्रदर्शन,कश्मीर, सीमा पर गोलीबारी, महंगाई, बेरोजगारी,पेट्रोल-डीजल के बढे दाम- यही सब सुनने को मिलता था। ....और इन सारे मुद्दों का हल गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास था। चार दशकों से चली आ रही गठबंधन की राजनीति का अवसान होने वाला था 2014 में नरेंद्र

Read More
Editorial

“नवम्बर क्रांति” चिरजीवी हो।

"नवम्बर क्रांति" के सम्बन्ध मे आयोजित "शहीद स्मारक समिति" की बैठक आज मुख्यालय पर विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर "नवम्बर क्रांति" की रोशनी मे "क्रांति" को भारत में सफल बनाने का संकल्प लिया।     महर्षि "मार्क्स" ने "नवम्बर क्रांति" को विकसित पूंजीवादी देश में सम्पन्न होने की बात कही थी लेकिन "लेनिन" ने "क्रांति" को रूस जैसे अविकसित पूंजीवादी देश मे सफल बनाकर विश्व मे एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। उसके बाद 100 सालों तक कहीं "क्रांति" नही हुई।      अब भारत में "नवम्बर क्रांति" जैसी भौतिक वस्तु परिस्थिति तेजी से विकसित हो रही है जिसके लिए राष्ट्रीय ही नहीं अपितु विश्व की परिस्थिति अनुकूल होने एवम् विप्लवी नेतृत्व के गठन से ही क्रांति सम्भव होगी।       भारत पूंजीवादी देश अवश्य है किन्तु आर्थिक दृष्टि से अत्यन्त कमजोर है। सारा मुनाफा स्वदेशी विदेशी अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियाँ मिल...

Read More