हासमुंद जिला में पिथौरा तहसील के शासकीय तथा आदिवासी जमीन के मुख्य घोटालेबाज लक्ष्मीनारायण अग्रवाल द्वारा अपने बेनामी सम्पत्ति की जब्ती को रोकने हाइकोर्ट में याचिका लगाई गयी थी, जिसे चीफ जस्टिस पी.आर. रामचंद्रन मेनन एवं पार्थ प्रीतम साहू की युगलपीठ ने फटकार लगाते हुए 2 मार्च 2020 को खारिज कर दिया। सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ याचिका लगाई गयी थी।

गरीब और बंधक मजदूर लक्ष्मण पि. इतवार घसिया के आयकर, पुलिस और राजधानी मीडिया के समक्ष दीये गये इकबालिया बयान और खुलासा के बाद 40 करोड़ से अधिक की बाजार मूल्य की जमीन जब्ती तथा राजसात की कार्यवाही की गयी है, जिसमें बरेकेल खुर्द के आदिवासी मानकी बाई तथा उसके पति तुलसी गोंड के नाम 26 एकड़ बेनामी है। ठीक इसी तरह भाजपा के प्रदेश मंत्री शंकर अग्रवाल के अग्रवाल धान प्रशोधन केंद्र जांघोरा में मृत आपरेटर आदिवासी रमेश पि. उमराव ध्रुव के नाम 28 एकड़ की बेनामी राजसात की गयी है।

मुख्यमंत्री एवं पुलिस महानिर्देशक द्वारा कराई गयी जांच में SDOP पिथौरा ने आयकर विभाग से जांच कराने की अनुशंसा की थी। उल्लेखनीय है कि आरोपी पक्ष के सभी 5 ने बेनामी सम्पत्ति नहीं होने का झूठा बयान दिया है। सीधे प्रधानमंत्री मोदी, DGP कार्यालय से प्राप्त पत्र तथा पीड़ित पक्ष के बयान के बाद रायपुर आयकर विभाग के बेनामी दस्ता ने अधि.1988 के तहत कार्यवाही सटीक और प्रभावी कार्यवाही की है, जिसमें जब्ती,पेनाल्टी तथा सजा का प्रावधान है। ज्ञात हो पिथौरा तहसील के 1000 एकड़ से अधिक जमीन घोटाले की जांच भी की जा रही है।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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