रायपुर (hct)। “अब होगा न्याय”। कांग्रेस यही कहती थी। जनता ने न्याय कर दिया। भाजपा को पीछे कर मोदी को आगे कर दिया। पूरा देश मोदी मय है। देश की राजनीति में कभी इंदिरा युग,राजीव युग हुआ करता था। आज मोदी युग है। 2014 जैसी मोदी की लहर 2019 में कहीं नहीं दिखी। पर आयेगा तो, मोदी ही आयेगा,जैसी बातों का सोशल मीडिया में जोर था। अमित शाह को 2014 से बड़ी लहर की जरूरत थी। लहर दिखी नहीं,लेकिन मोदी के लिए सबने बढ़ी सीटें देखी। मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक चुनावी परिणाम से हैरान हैं। हैरान होना स्वाभाविक है। इसलिए कि देश में मोदी लहर नहीं बल्कि, चौकीदार चोर है,के नारे का शोर गांव से शहर तक था। लेकिन यह हुआ कैसे? बस,इतनी सी बात है। मोदी है तो मुमकिन हैं। सवाल यह है कि क्या इस बार अच्छे दिन आयेंगे से अधिक पाॅवर फूल नारा राष्ट्रवाद था? राष्ट्रवाद के नाम पर मोदी को वोट मिला,या फिर वजह कोई और है। वैसे 20 लाख ईवीएम मशीन लापता है। कहां गई,चुनाव आयोग को भी पता नहीं। इन सबके बावजूद, जो जीता वही सिंकदर है।
लालू युग का अंत…यूपी को लेकर एग्जिट पोल की रिपोर्ट गलत साबित हुई। महागठबंधन को 58 सीटें दे रहे थे। एनडीए को 20 से 22 सीटें। लेकिन परिणाम ठीक उल्टे हो गये। पश्चिम बंगाल में ममता दीदी मोदी और अमित शाह को गुंडा बोलती रहीं और राजनीति के ये करण, अर्जुन वहां 18 स्थानों में कमल खिला दिये। बिहार में सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को हुआ। लालू के जेल में होने से बिहार की राजनीति में लालू युग का अंत हो गया। बिहार की 40 सीट में 39 बीजेपी और एक यूपीए को मिली। राजस्थान में 25 सीट में कांग्रेस एक भी सीट नहीं पाई।
कमल ने सबको नाथ दिया..

मध्यप्रदेश में कमल नाथ जो चाहते थे वो हो गया। ऐसा कांग्रेस के लोग कह सकते हैं। सुपर सीएम दिग्विजय सिंह को राघोगढ़ की बजाय भोपाल से लड़ा कर उनकी लोकप्रियता को बट्टा लगा दिया। एक अराजनीतिक महिला प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को मात देकर भाजपा की दूसरी उमा भारती बन गईं। वहीं कमलनाथ खुद तो जीते, साथ ही अपने बेटे नकुलनाथ को भी जिता लिये। जाहिर है कि वे मध्यप्रदेश की राजनीति में एक छत्र राज्य करने की जो रणनीति बनाई, उसमें कायमयाब हो गये। सीएम की दौड़ में रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया हार गए। मध्यप्रदेश में पंजा’ मजबूत तो नहीं हुआ लेकिन, कमलनाथ के हाथ में सत्ता’’ बनी रहेगी। मोदी और अमितशाह की भृकुटि जब तक नहीं तनती। कमलनाथ अपने किस मंत्री से इस्तीफा मांगते हैं ,शिवराज भी देखना चाहेंगे। वैसे वे यही कहेंगे,हार की समीक्षा की जायेगी। उसके बाद ही कुछ निर्णय लिया जायेगा।
भूपेश सफल सी.एम नहीं ?..

छत्तीसगढ़ में सी.एम भूपेश बघेल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद दावा करते रहे कि सभी 11सीटें जीतेंगे। एक सीट का इजाफा तो हुआ लेकिन, जादूगर सरकार जैसा जादू नहीं दिखा सके। रमन सरकार के हर कामकाज की जांच एसआइटी से कराके, केवल सुर्खियां खूब बटोरी। जाहिर है कि वे बदलापुर की राजनीति ही अब तक करते आये हैं। उन्हें अपनी राजनीति की दिशा अब बदलनी पड़ेगी। नहीं तो अगली दफा कांग्रेस की सरकार बनने में दिक्कत हो सकती है। आये चुनाव परिणाम से जाहिर है कि उनके राजनीतिक और मीडिया सलाहकार कमजोर हैं। जो प्रदेश की जनता के नब्ज को नहीं समझ सके और भूपेश बघेल को एसआइटी की राजनीति में ही उलझाये रखे। भूपेश बघेल कहते हैं राष्ट्रवाद के लिए जनता ने मोदी को वोट किया। यानी उनका काम काज लुभावने वाला नहीं रहा।
विधान सभा अध्यक्ष चरणदास महंत की पत्नी ज्योत्सना महंत कोरबा और बस्तर से दीपक बैज लोकसभा जीत कर कांग्रेस की लाज बचा ली। भाजपा अपना गढ़ बचाने में सफल रही। भूपेश को देर से समझ मे आई कि जनता ने राष्ट्रवाद के नाम पर वोट किया है,न कि भूपेश सरकार के चार माह के कामकाज पर।
डाॅ रमन सिंह नौ सीट भाजपा को जिता कर,विधान सभा चुनाव की हार का बदला ले लिये। अब भूपेश बघेल को बदलापुर की राजनीति की बजाय प्रदेश के हित की राजनीति को तवज्जो देना चाहिए। इसलिए कि केन्द्र में मोदी की सरकार बन गई है। मध्यप्रदेश,राजस्थान,और छत्तीसगढ़ की ओर दिल्ली से जाने वाली आर्थिक हवा पर रोक भी लगा सकते हैं। देश ने मोदी को बड़ी उम्मीदों के साथ एक और मौका दिया है। जनता ने न्याय तो कर दिया,अब उन्हें सच में, अच्छे दिन देशवासियों को देना बाकी है।

(यह लेख; राष्ट्रीय दैनिक “नया इंडिया” व्हाट्सएप्प ग्रुप से रमेश कुमार ‘रिपु’ के द्वारा प्रेषित किया गया था जिसे साभार लिया गया है।)

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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