किरीट ठक्कर
गरियाबंद। उदन्ति सीतानदी टाईगर रिजर्व कार्यालय में लोकधन के गबन का मामला प्रकाश में आया है, एक तरफ प्रार्थी डिगलेश्वर ठाकुर ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक को आवेदन प्रस्तुत कर तत्कालीन कार्यालय स्थापना प्रभारी सहित तीन अन्य लोगों पर अपराध दर्ज करने की मांग की है, तो दूसरी ओर प्रभारी अधिकारी इसे मानवीय भूल व लिपिकीय त्रुटी बता रहे हैं !
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग के वाहन चालक स्वर्गीय वेंकटराव के उपचार के लिए उन्हे एनएचएमएमआई हास्पिटल रायपुर में एडमिट कराया गया था, जिनकी मृत्यु मई 2017 में हो गई। वेंकटराव की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी कांतिबाई के द्वारा उपचार में किये गये व्यय की प्रतिपुर्ति राशि 2 लाख 9 हजार 602 रु की मांग नियमानुसार सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक से की गई।
अस्पताल अधीक्षक द्वारा 1 लाख 64 हजार 502 रु पारित कर उप निदेशक कार्यालय, उदन्ति सीतानदी टाईगर रिजर्व गरियाबंद को भेजा गया, जिसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत प्रार्थी ने प्राप्त कर ली।
अब प्रार्थी का आरोप है की कार्यालय के तत्कालीन लेखापाल व स्थापना प्रभारी ईश्वरी जगतवंशी, अंकुश उपाध्याय स्टेनो ग्रेड 3, कमल साहू, दैनिक श्रमिक स्थापना शाखा तथा स्व० वेंकटराव के पुत्र ओमप्रकाश राव वन रक्षक ने एक राय होकर लोकधन का गबन करने के उद्देश्य से सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के द्वारा प्रमाणित पत्र क्रमांक 1019 में अंकित राशि 2 लाख 9 हजार 602 को कांट-छांट कर उसे 3 लाख 9 हजार 602 कर दिया ! साथ ही सिविल सर्जन द्वारा स्वीकृत राशि; 1 लाख 64 हजार 502 रु को कांट-छांट कर 2 लाख 64 हजार 502 कर दिया एवं बीटीआर क्रमांक 3771154 बिल सिरियल नं 2001022862 जिला कोषालय को भेज दिया गया। उपरोक्त फर्जी बीटीआर क्रमांक एवं बिल के आधार पर 2 लाख 64 हजार 502 रु की राशि अनावेदक क्रमांक 4 ने प्राप्त कर ली, जिसकी शिकायत मुख्य वन संरक्षक रायपुर से की गई।
इस संबध में सूचना का अधिकार के तहत लगे आवेदन की जानकारी जब अनावेदकों को लगी तब लीपापोती के उद्देश्य से गबन की एक लाख रुपए की राशि ट्रेजरी चालान के माध्यम से उप निदेशक टायगर रिजर्व कार्यालय गरियाबंद के खाते में जमा करा दी गई।

क्या कहते है अधिकारी

मामले की जानकारी होने पर इस संवाददाता ने प्रभारी उप निदेशक, आर के रायस्त, सीतानदी टाईगर रिजर्व कार्यालय, से उनका पक्ष जानना चाहा, जिस पर उन्होने बताया की मामले की विभागीय जांच की चुकी है, साथ जांच प्रतिवेदन उच्च कार्यालय को प्रेषित कर मामला नस्तीबद्ध किया जा चुका है। लिपिकिय त्रुटी या मानवीय भूल के चलते एक लाख रुपए अधिक का भुगतान हो गया था, जिसे तत्काल वेंकटराव की पत्नि से रकम वसूली की कार्यवाही की गई और एक माह के अंदर चालान द्वारा राशि जमा कर दी गई है।
इस मामले पर मैने जांच प्रतिवेदन; मुख्य वन संरक्षक, रायपुर की ओर प्रेषित कर प्रकरण नस्तीबद्ध करने का आग्रह किया है।

 

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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