*भरत सोनी।

रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय विपदा “कोरोना” जैसी महामारी का खौफ ऐसा कि सरकार ने तो एहतियातन समूचे देश में लॉक्ड डाउन का फरमान जारी किया हुआ है ऐसी विपदा संकट के समय भारत जैसे विशाल आस्था वाले देश में नरेंद्र दामोदर मोदी ने प्रत्येक गरीब परिवार को उनके जनधन वाले खाते में (जहाँ १५ लाख प्रत्येक में……..) 500 रुपए प्रति माह के हिसाब से तीन महीने के लिए 1500 रुपए देने की घोषणा की है। 130 करोड़ की आबादी में 80 करोड़ लोगों तक सस्ता राशन व अन्य सुविधाओं के लिए 1लाख 70 हजार करोड़ रुपये के राहत की घोषणाओं के साथ अपना योगदान दिया है।

धन्य है मेरा भारत, इस देश में मेहमान को भगवान का दर्जा प्राप्त है और जब स्वयं भगवान किसी गरीब की झोपडी में प्रगट हो जाए तो ? एक तो गरीबी की मार दूजा कोरोना का वार, ऊपर से  “लॉक्ड डाउन” की पाबन्दी अब ऐसे में स्वयं भगवान शिव अथवा उनका नंदी किसी गरीब बस्ती में दूध पीने चली आए तो….लिखना जरुरी है साहब।

जी हाँ, राजधानी रायपुर चंगोराभाठा इलाके के एक पारा (मोहल्ला) में नंदी के दूध पीने की अफवाह से बस्ती का हुजूम नंदी को दूध पिलाने उमड़ पड़ा। बता दें कि यह अफवाह जिस बस्ती से उडी है उस बस्ती में 70 से 80 फीसदी मजदूरो की आबादी है जहाँ आज के दिनांक में न तो न तो उनके पास कोरोना से सुरक्षा के लिए मास्क है ना ही खरीदने के पैसे हैं ना ही यदि “कोरोना” जैसे महामारी संक्रमण हो जाये तो, परीक्षण व उपचार कराने के लिए पर्याप्त रुपए। और तो और हमारे राज्य या क्षेत्र के किसी जनप्रतिनिधियों ने कोई सुध ली है।

ऐसे परिस्थिति में WHO-ICMR की भारत सरकार को चेतावनी भी चिंतनीय है कि अगर भारत कल रात तक थर्ड स्टेज यानी कम्यूनिटी ट्रांशमिशन में जाता है तो भारत में 15 APRIL तक 50000 हजार ( FIFTY THOUSAND) लोगों की मौते हो सकती है ! समूचे छत्तीसगढ़ को खतरे में डाल सकता है। आपको यह भी बता दे कि नगर पालिका के तरफ से अब तक इस बस्ती में एक भी जिम्मेदार झांकना तो दूर नाम सुनना भी गंवारा नहीं समझता।

केंद्र व राज्य सरकार ने घोषणाएं तो बहुत की है उन पर अमल करना भी ज़रूरी है। देश के कई इलाकों में दिहाड़ी मजदूर फॅसे है,जो किसी सुविधाओं के अभाव में पैदल यात्रा कर अपने घर जाना चाहते हैं। रोजी रोटी की मार, बेरोजगारी की मार, अपना व बच्चों के पेट पालने का भार, महामारी कोरोना की मार और इस बीच सड़कों पर दिख गए तो, मुफ्त में कुछ मिले या ना मिले पुलिस की मार…… वो भी जी भर कर।

धन्य हो, आदरणीय।
तुम्हें शत शत नमन….।

आम जनता को कुछ मिले या ना मिले ऐसा उपचार आवश्यक है, आखिर, महामारी जो फैली है……..

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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