डॉ. प्रियंका रेड्डी की चिता से आग बुझी भी नहीं कि हवस की आग में छत्तीसगढ़ में एक नहीं बल्कि दो और बेटियां स्वाहा हो गई। बलरामपुर जिले की एक घटना जहाँ किसी युवती का शव जला हुआ अर्धनग्न अवस्था मे बलरामपुर के मुरका बांध के पास मिला है। अभी तक इसकी पहचान नही हो पाई है युवती 22 से 30 वर्ष की बताई जा रही है वहीं राजधानी के करीब ही नकटी गांव में एक 25 वर्षीय युवती की अधजली लाश मिलने से सनसनी फैल गई। युवती की लाश के करीब ही 4 साल के एक बच्चे की जली लाश मिली है।

रायपुर। नकटी ग्राम में राइस मिल के करीब दो अधजली लाश मिलने से पुलिस फौरन हरकत में आई। खुद एसएसपी आरिफ शेख घटनास्थल पर पहुंचे। एफएसएल की टीम भी तत्काल घटनास्थल पर पहुंची…, लेकिन तब तक खबर आग की तरह छत्तीसगढ़ में फैल गई।

आशंका व्यक्त की जा रही है कि दोनों मां-बेटे हो सकते है। इससे पहले शनिवार को बिलासपुर के सरकंडा इलाके में एक युवती के साथ तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया है। पीड़िता ने अपनी सहेली के साथ जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई चुकी थी।

हैदराबाद में ही घटना के दूसरे दिन उसी इलाके से एक और युवती की जली हुई लाश बरामद हुई। इधर झारखंड में आदिवासी छात्रा के साथ गैंग रेप कर उसे मार दिया गया, सभी 12 दरिंदें भी उसी के समाज से बताये जाते हैं। खबरों के अनुसार प्रियंका रेड्डी के बाद देश में 10 और घटनायें हो गयी, अलीगढ़ क्षेत्र के खेलड़ी में भी पांच साल की बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई। उफ़ इतनी विभत्स हत्याऐं और बलात्कार ! यह पूरे समाज की जागरूकता, चिंतन और चिंता का विषय होना चाहिए।

इसे या तो अपराधियों का बढ़ता बुलंद हौसला कह सकते हैं अथवा पुलिस की बढ़ती नाकामी। सवाल इस बात का नहीं है कि इतनी वारदातें कैसे हो रही है ? सवाल इस बात का है कि ये वारदातें क्यों हुई ? सवाल तो इस बात का है ये दरिंदगी कब खत्म होगी ? सवाल इस बात का भी है कि ये वहशी दरिंदे कब पकड़े जाएंगे ? सवाल इस बात का नहीं है कि क्या इन घटनाओं का विरोध होगा या नही ? सवाल इस बात का है ऐसी घटनाएं कब बंद होंगी और होगी भी या नहीं ? सिर्फ कैंडल जलाकर मार्च करने से कुछ नहीं होने वाला है। ये बलात्कारी, हत्यारे, अपराधी; देश पर बोझ हैं। अब तो फास्ट ट्रैक कोर्ट में निबटाओ फांसी देकर। देश पर अपराधियों का बोझ बढ़ाने से कोई औचित्य नहीं।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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