जातिवाद से ग्रसित भूपेश का कारवां थम नहीं रहा…!

के कोरलैया
भिलाई (दुर्ग)। मामला छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति डॉ एम.के. वर्मा से संबंधित है जिन्होंने यात्रा भत्ता देयक में भ्रष्टाचार किये थे। जिसकी शिकायत एक बड़े सामाजिक कार्यकर्ता ने राज्यपाल को किया था।
डॉ. एम.के. वर्मा, कुलपति
स्वामी विवेकानंद तकनीकी विवि, भिलाई।
आचार संहिता हटते ही कुलपति को न हटाकर कुलसचिव को पद से हटा दिया गया है ! विवि के कुलसचिव श्री डी.एन. (साहू) सिरसांत का कार्यकाल अभी शेष था, जिन पर न तो कोई आरोप है और न ही कोई लंबित जांच।
श्री डी. एन. (साहू) सिरसांत, कुलसचिव, स्वामी विवेकानंद तकनीकी विवि. भिलाई।
निवर्तमान कुलसचिव श्री सिरसांत के पद पर पंडित रविशंकर शुक्ल विवि में कार्यरत तकनीकी अधिकारी डॉ के. के. वर्मा को पदस्थ कर दिया गया है जो कुलसचिव पद के लिए निर्धारित अहर्ता नहीं रखते हैं।
डॉ. के के वर्मा, नवपदस्थ कुलसचिव, स्वामी विवेकानंद तकनीकी विवि. भिलाई।
जानकारी के लिए बता दें कि कुल सचिव के पद पर एक निश्चित मापदंड होता है जिसके तहत कम से कम 8 साल प्रोफेसर के नाते अनुभव आवश्यक होती है। जो डॉ के के वर्मा के पास नहीं है इनके पास महज 3 वर्ष (2016 से इन्होने प्रोफेसरशिप के तहत इनकम हासिल किया है।)
श्री सिरसांत राज्य के शासकीय विश्वविद्यालयों में कुलसचिव के पद पर कार्यरत साहू समाज से एकमात्र प्रतिनिधि थे। जिन्हें माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने रिश्तेदारों को उपकृत करने के लिए हटा दिया है।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.