अधिवक्ता हितों के लिए संकल्पित, संघर्षरत संजय शर्मा।

रायपुर। राजधानी के अधिवक्ता संघ चुनाव शीघ्र ही होने को है, आगामी होने वाले संघ के चुनाव में अब तक 9 दावेदारों का नाम उभर कर आया है। राजधानी के अधिवक्ता संघ चुनाव में इस बार छत्तीसगढ़ राज्य अधिवक्ता परिषद के उपाध्यक्ष, संजय शर्मा अध्यक्ष पद हेतु सशक्त दावेदारी कर रहे हैं।अधिवक्ता संजय शर्मा सन 1996 से विधि व्यवसाय से जुड़े हैं।
श्री शर्मा पूर्व में कार्यकारिणी सदस्य, सचिव पद की जिम्मेदारी संघ में निभा चुके हैं, तथा वर्ष 2014 में सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य अधिवक्ता परिषद में चुने गए। राज्य परिषद में रहते हुए श्री शर्मा ने अध्यक्ष परीक्षण समिति का कार्यभार संभालते हुए अपने कार्यकाल में अधिवक्ताओं के विरुद्ध की गई शिकायतों का परीक्षण करते हुए लगभग उन 60 प्रतिशत शिकायतों को खारिज किया जो अधिवक्ताओं पर असत्य आधारों पर लगाई गई थी तथा अधिवक्ताओं के विरुद्ध की गई झूठी शिकायतों पर शिकायतकर्ता के विरुद्ध दण्ड वसूली किए जाने का भी उल्लेख किया। ताकि भविष्य में अधिवक्ताओं के विरुद्ध इस प्रकार की जाने वाले झूठी शिकायत पर लोगों को सबक मिले।
अधिवक्ता संजय शर्मा प्रारंभ से ही अधिवक्ताओं के हितों हेतु संघर्षरत रहे। चाहे कार्यकारिणी सदस्य के रूप में हो, अधिवक्ता संघ के सचिव पद पर हो या राज्य अधिवक्ता परिषद में। सदा अधिवक्ताओं के कल्याण,
अधिवक्ताओं के सुख-दुख व अधिवक्ता साथियों के हितों से संबंधित कार्य में वे सदैव अग्रसर रहें है।
श्री शर्मा वर्ष 2016 में अधिवक्ता संघ चुनाव में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किए गए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में भी उन्होंने अपनी सशक्त भूमिका निभाते हुए हाईटेक चुनाव पद्धति अपनाकर संपूर्ण आचार संहिता का पालन कराते हुए 12 दिनों में चुनाव संपन्न कराया। उक्त चुनाव पिछले हुए चुनाव के मद्दे स्मरणीय रहा,क्योंकि संघ चुनाव में आचार संहिता की छड़ी पूरी चुनावी माहौल में स्पष्ट झलकती रही।
इसी तरह वर्ष 2017 में भी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव में भी स्पेशल ऑब्जर्वर के रूप में इनकी अहम भूमिका रही।
     वर्ष 2007 से 2010 के बीच अधिवक्ता संजय शर्मा द्वारा रायपुर अधिवक्ता संघ में सचिव पद हेतु निर्वाचित होकर कार्य किया। श्री शर्मा के अनुसार उन्होंने अपने कार्यकाल में रायपुर बार को हाईटेक किया, 70 जर्नल की सीडी रायपुर बार के कंप्यूटर में लोड करवाई, प्रत्येक बार रूम में माइक सिस्टम की व्यवस्था कराई गई, अधिवक्ता कक्ष में रंगीन टीवी लगाई गई, पेयजल के लिए बोर की व्यवस्था, शास्त्री चौक से संघ की टंकी में सीधा कनेक्शन करवाया गया, पुराने भवन के बीच रिक्त स्थान को अधिवक्तागण के भोजन अवकाश हेतु सुरक्षित कराया, स्वयं के व्यय पर टेलिफोन डायरेक्टरी बना कर उसका निशुल्क वितरण कराया गया, पुरानी बिल्डिंग से नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव, पुरानी बिल्डिंग में पीडब्ल्यूडी के माध्यम से 28 लाख रुपए की लागत से अधिवक्ताओं की बैठक व्यवस्था हेतु चेंबर निर्माण, राज्य अधिवक्ता परिषद के निर्देशानुसार अधिवक्ता संघ की बैठक बुलाकर मान्यता नियम 2009, त्रुटि व संशोधन के बाद लागू किए जाने का प्रयास,जिसके आधार पर अधिवक्ता संघ चुनाव संपन्न कराया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य अधिवक्ता परिषद में रहते हुए रायपुर अधिवक्ता संघ में राज्य अधिवक्ता परिषद का शिविर आयोजन कराना, जिसमें अधिवक्ताओं के पंजीयन, मृत्युदावा,सनद, परिचय पत्र, नाम व स्थान परिवर्तन, त्रुटि सुधार आदि परिषद से संबंधित कार्यों के लिए शिविर के माध्यम से कार्य संपन्न कराया। अधिवक्ताओं को मिलने वाली मृत्यु दावा राशि बढ़ाने हेतु प्रयास, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करवाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात कर उन्हें अधिवक्ताओं की समस्याओं से अवगत कराया,
न्यायालय परिसर में फर्जी जमानतदार की सक्रियता पर उनके विरुद्ध कार्यवाही किए जाने हेतु हाईकोर्ट व जिला व सत्र न्यायाधीश को पत्र प्रेषित। जिन क्षेत्रों में व्यवहार न्यायालय के भवन तैयार थे, उन भवनो में शीघ्र ही न्यायालय की स्थापना करवाने का प्रयास, समय-समय पर अधिवक्ताओं को कार्यस्थल पर होने वाली समस्या व उनके विरुद्ध विधि विपरित किए जाने वाले कार्यवाहीयो में तत्परता से अधिवक्ता हित में पत्राचार व प्रत्यक्ष रुप से उपस्थित होकर अधिवक्ताओं को हर संभव सहयोग करना, शोक सभा कार्य स्थगित के दौरान कार्य किए जाने पर जिला न्यायाधीश को अवगत करा उचित कार्रवाई किए जाने बाबत पत्र व्यवहार, उच्च न्यायिक सेवा में बार कोटा से होने वाली नियुक्तियों में आयु सीमा में वृद्धि करने हेतु प्रयास करना आदि। अधिवक्ता साथियों के लिए सदैव तत्पर व समर्पित श्री शर्मा अपने ठोस इरादों व बुलंद हौसलों के साथ इस बार अध्यक्ष पद पर सशक्त दावेदारी करते हुए अधिवक्ता हित में संघ के माध्यम से अधिवक्ताओं के सम्मान व सुरक्षा के लिए संकल्पित हैं।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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