अजब तेरी किस्मत अजब तेरे खेल,
छछूंदर के सर पर चमेली का तेल।

चीटी चढ़ी पहाड़ पर, सर पर लादे, नौ मन तेल…!
मिली छ्छूंदर एक वहां, उसके सर पर दिया उड़ेल।

रायपुर (hct)। आज तो हम घूम गये, सीधे-सीधे चींटी और छछून्दर की बात तो कर नहीं रहे। आप, इत्ते सीधे तो हैं नही; और पीछे वाली बात क्या है ? ये मेरी समझ में आ नहीं रहा, क्योंकि हम इत्ते टेढ़े नहीं हैं। हमें सीधी-सादी बाते समझ में आती है; मामला क्या है…?
दरअसल बात यह है कि सरकार बदली तो उनके नुमाइंदे भी बदल दिए गए, बस्तर में नक्सल ऑपरेशन के मुखिया रहे डीआईजी अवस्थी को बस्तर से रायपुर बुला लिया गया, पर ये क्या कि उन्होंने अपने रुतबे और वर्दी का नाहक फायदा उठाकर एक लाचार नगर सैनिक को जेल भिजवा दिया ! क्योंकि वो उसे नगर सैनिक होने के कारण निलम्बित नही कर सकते। इसलिए उसकी गलती पर लापरवाही और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप की धारा 279, 307 लगवा कर उसे जघन्य अपराधी बना दिये ?
लापरवाही तो हो सकती है किन्तु हत्या का प्रयास या षड्यंत्र कि धारा 307 बात समझ से बाहर है।
ना किसी से उक्त चालक का बैर न घटना में किसी के हताहत होने की रिपोर्ट न किसी का सरकारी मुलायजा..! फिर बिना मुलायजा कराए अर्धहत्या “half Murder” की धारा 307..!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीजीपी ने उक्त घटना स्थल के संबंधित थाना सिविल लाइन के टीआई को यह आदेश दी अगर उनके हिसाब से कार्यवाही नही कि गई तो सम्भवतः उसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
हो सकता है यह सत्य भी हो किंतु उच्चाधिकारियों के भय में अन्य पदाधिकारी स्वयं के साथ हो रहे इस अन्याय का खुलकर विरोध कर पाने में असमर्थ प्रतीत होते है यह कटुसत्य है। उस नगर सैनिक का दोष सिर्फ इतना था कि उसे उस वाहन को चलाने का जिम्मा उक्त वाहन के नामजद चालक ने या न जाने किस मूढ़मति ने दे दिया..!
वाहन सवार ड्राइवर रूपी नगर सैनिक जिस वाहन का वह चालक बताया जा रहा है वह उक्त वाहन का चालक है ही नहीं, फलस्वरूप रिवर्स लेते समय पूर्ण अंदाजा नहीं होने के कारण डीजी साहब के पड़ोसी का दीवाल वाहन की चपेट में आकर टूट गया। जिससे DGP साहब की व्यक्तिगत भावना बेहद आहत हुई और उन्होंने उक्त सैनिक को जेल दाख़िल करने का निश्चय कर लिया।
अज्ञात सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिनांक 04 फरवरी को “RAIPUR POLICE QRT 1” लिखा वाहन को उक्त वाहन के चालक की अनुपस्थिति में बस्तर से परिवार की जिम्मेदारी निभाने आया नगर सैनिक रायपुर में पदस्थ सिपाही “रंगकुमार मरकाम” को महंगी पड़ गई।

घटना के विषय मे आंशिक जानकारी एक पोर्टल के माध्यम से यह प्राप्त हुई है कि -“रायपुर के सिविल लाइन इलाके में एक डिप्टी कलेक्टर के बंगले में पुलिस बस घुस गई जिससे अफरातफरी का माहौल हो गया। बताया जाता है कि जिस समय बंगले में बस घुसी उस समय वहां कोई नहीं था। बड़ी बात यह है कि इसी बंगले के बाजू में छत्तीसगढ़ पुलिस के DGP DM अवस्थी का भी बंगला है।
बताया जाता है कि बस जवानों को लेकर कहीं जा रहा था कि अचानक बस के ड्राइवर ने बस से अपना नियंत्रण खो दिया और बस सीधे बंगले में घुस गई। हालांकि इस दुर्घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पुलिस के मुताबिक न तो किसी जवान न ही बंगले के आसपास के लोगों को कोई नुकसान हुआ है।” जानकारी मिलते ही मौके पर DGP अवस्थी भी पहुंचे उन्होंने पूछताछ की और सिविल लाइन थाना प्रभारी को (सम्भवतः) आदेशित किया होगा कि बचना नहीं चाहिए…

By Kirit Thakkar

विगत 10 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक आलेख, कविताएं, व्यंग रचनायें प्रकाशित, पढ़ना लिखना विशेष अभिरुचि, गरियाबंद जिले में "हाईवे क्राइम टाइम" के जिला ब्यूरो चीफ पद पर नियुक्त।

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