ChhattisgarhPolitics

कवासी आज भी एक शोषित आदिवासी जन नेता…

जिस सलवा जुडूम नेता ने कवासी को घुटने टिकवाया था, कवासी ने उसे बनाया निजी सचिव…!

राहुल और भूपेश को होगी शिकायत।

रायपुर । हमेशा आदिवासियों की बात करने वाले और उन्ही के वोट से जीतने वाले कवासी लखमा की ऐसी क्या मजबूरी है कि उन्हें अपने सचिव के लिए पूरे बस्तर से कोई एक भी योग्य व्यक्ति नही मिला। कवासी ने जिस व्यक्ति को निजी सचिव बनाया है, वह भाजपा शासन में सत्ता के न केवल करीबी था, बल्कि मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री भी उनके सखा जैसे थे।
क्षेत्र का बड़ा ठेकेदार और सप्लायर रहते इस पर भ्रष्टाचार के कई बड़े आरोप लग चुके हैं। यही नही रामभुवन कुशवाहा खुद आदिवासी अत्याचार के उस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल रहा, जिसका कवासी ने खुद विरोध किया था।
वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्रा ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है कि  ”इसी रामभुवन ने कवासी लखमा को विधायक रहते घुटना टिकवाया था। ये सलवा जुडूम के समय की बात है। पोलमपल्ली जुडूम कैम्प का मामला है। लखमा जी तब एक घण्टे घुटने पर रहे। आज रामभुवन लखमा के सबसे खास हैं। मतलब कवासी की कोई तो मजबूरी है जो अभी भी रामभुवन के घुटने में हैं।”
आदिवासियों पर खुद के द्वारा ढाए कहर की वजह से रामभुवन को बस्तर छोड़कर धमतरी में भी सुरक्षा गार्ड के सहारे रहना पड़ता है। लोगों का तो यह भी मानना है कि जिस कवासी को जन नेता होने की वजह से माओवादियों ने झीरम के समय छोड़ दिया था, अब इस आदमी की वजह से उन्हें भी खतरा पैदा हो गया है।
कवासी ने एक अकेले इस ठेकेदार को अपने नजदीकी साथियों के विरोध के बावजूद जिस जिद से अपना निजी सचिव बनाया है उससे कवासी के राजनीतिक भविष्य पर ही नही बल्कि बस्तर के दोनों लोकसभा पर कांग्रेस की जीतती बाजी पलट दिख रही है।

भूपेश बघेल और राहुल गांधी से होगी शिकायत…

पता चला है कि इस मामले में नाराज कई आदिवासी नेता और समाजसेवी प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से शिकायत करने जा रहे हैं। वे इस बात से नाराज भी हैं कि जिस व्यक्ति ने कवासी के चुनाव में भी मदद नही की और हमेशा अपने व्यक्तिगत फायदे की राजनीति की उस एक अकेले की वजह से कवासी दादी ने क्षेत्र के हजारों कार्यकर्ता को नाराज कर दिया है।
कमल शुक्ला

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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