कांकेर। छत्तीसगढ़ की पिछली भाजपा सरकार को इस बार के चुनाव में करारी हार व लुटिया डुबोने में तत्कालिक मंत्रियों व विधायकों के ”खास” व उनके ”निज सहायको” को भी पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदार पाना है और आज भी हार की समीक्षा में इनकी भूमिका पर भी कई सवाल खडे़ किये जा रहे।
”भूपेश बघेल” की सरकार के अंदर भी इनकी ”नियुक्ति व घुसपैठ” को लेकर रायपुर शहर अध्यक्ष गिरीश दुबे के नेतृत्व में सरकार के मुखिया को मौखिक व लिखित शिकायत कर कहा कि – पिछली सरकार में रहे मंत्रियों व विधायको के पास तैनात रहे स्टाफ को नई सरकार में अटैच व नियुक्त नहीं करने की मांग करते हुये हटाने की मांग की है और आगे कहा कि ”पिछली सरकार में 15 साल तक सत्ता के लोगों के साथ जुडे़ रहे निजी और प्रशासनिक स्टाफ फिर एक बार कांग्रेस सरकार के मंत्रियों व विधायकों के पास ”घुसपैठ व अटैच” होने लगे हैं तो कुछ हो भी गये हैं; इससे सरकार की छबि बिगड़ सकती हैं और बिगड़ रही है ऐसे स्टाफ को बिल्कुल भी नयी सरकार के सभी कार्यों से काफी दूर रखा जायें क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो ”सब कुछ” पुराने ढर्रे पर चलने लगेगा और सरकार की साफ सुथरी छबि भी इनके कारण बदनाम होने लगेगी। शहर अध्यक्ष ने पत्र में एक ”सूची” भी सौपीं है जिसमें पुराने सरकार में रहे और अब नये विधायकों व मंत्रियों के साथ चले एवं ”अटैच” हो गये हैं।

कांग्रेस की लिस्ट में है कुछ खास नाम

पिछली सरकार में पर्यटन मंत्री रहे दयालदास बघेल के यहां रहे अब ताम्रध्वज साहू के यहां ”एडजेस्ट” किये गए तो पूर्व स्पीकर ‘विधानसभा अध्यक्ष’ के निजी स्टाफ रहे जितेंद्र साहू व नितिन पांडे दोनों ही अब स्वास्थ्य मंत्री ”बाबा” के पास चिपक गये है तो पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे राजेश मूणत के विषेश सहायक रहे गिरीराज खंडेलवाल अब रायपुर विधायक कुलदीप जुनेजा के पास जा दुबके और श्री चंद सुंदरानी के निज सहायक रहे बैष्णव अब धरसींवा विधायक के यहाँ पोस्टिंग पाने में सफल रहे हैं, वही खेल मंत्री रहे भैयालाल रजवाड़े के यहां स्टाफ रहे सुभाष ओझा अब वन व खाद्य मंत्री मो.अकबर के यहां पदस्थ हो गए हैं और हितेंद्र तन्ना महिला बाल विकास के निजी स्टाफ के रूप में नियुक्त होने में सफल हो चुके हैं।
पूर्व संसदीय सचिव श्रीमती रूपकुमार चौधरी के रहे गुलशन राजपूत और गृह मंत्री रहे रामसेवक पैकरा के स्टाफ में रहे ”भोई” अब कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के यहां अटैच हुये तो पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के यहाँ पदस्थ रहे रामकुमार साहू भिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव के यहां पदस्थ किया गया।

 चपरासी भी मंत्रियों के यहां एडजेस्ट हुए…! 

पिछली सरकार के कुछ सफेद टोपी चपरासी इनमें सें कुछ ऐसे है जब राज्य की पहली कांग्रेस की सरकार के समय के मंत्रियों के यहां तैनात व पदस्थ रहे व थे अब वो उन्हीं संबंधो के हवाले से फिर से कुर्सी पाने में सफल हुये एवं रहे। इस बार के चुनाव में मंत्रियों की हार के मुंह तक ले जाने वाले फिर सें नये मंत्रियों के यहां तैनात हो गए है और सामान्य प्रशासन विभाग से आ रही खबरों पर भरोसा करें तो इस बार कुछ ऐसा ही खेल हो गया है इतना ही हाल में ”कोर्टमिर्नस” के तहत नियुक्त किये गये जो फिर से मंत्रियों के यहां लौट गये।

ओएसडी के दौड़ में भी अनेक शामिल पर…

जैसे ही कांग्रेस की सरकार छत्तीसगढ़ में बनी तो मंत्रियों के यहां ओएसडी बनने को लेकर कुछ उनके खास लोगों के द्वारा ” एडजेस्ट ” किये जाने की चर्चा राजधानी से लेकर बस्तर में होती रही तो कुछ अपने ‘भ्रष्टाचार व घोटालो’ को छुपाने के लिये सरकार में घुसने की कोशिश करते रहे और सफलता की ओर बढते ही रहे की उनके भ्रष्टाचार की पोल खुलने के कारण वह मामला अब ”ठंडेबस्ते” मे चले गये तो वही जिला पंचायत में एक समय में पदस्थ रहे मनरेगा के ”घोटालेबाज” अफसर भी सरकार की मंत्री के यहां घुसने की कोशिश करते रहे पर ” नाकाम ” ही रहे ….
देखना अब यह है की मुख्यमंत्री कांग्रेस पदाधिकारियों की शिकायत पर क्या कार्यवाही करते हैं पर उन्होंने इस मामले पर ”देखने” की बात कही है।

*अनुराग उपाध्याय, कांकेर।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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