डीयू की प्रोफेसर व प्रख्यात समाजसेवी नन्दनी सुंदर को सुकमा पुलिस की क्लीनचिट।

रायपुर । छत्तीसगढ़ पुलिस ने बस्तर में तत्कालीन समय मे पदस्थ कुख्यात आईजी एसआरपी कल्लुरी के इशारे पर सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र में हुई एक हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर व प्रख्यात समाजसेवी नन्दनी सुंदर, अर्चना प्रसाद, विनीत कुमार व संजय पराते के खिलाफ जांच में कोई सबूत नही मिलने का दावा करते हुए इनके नाम चार्जशीट से नाम वापस लेने का फैसला किया है। उक्ताशय का समाचार देश के प्रसिद्ध हिंदी वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स के रितेश मिश्रा के हवाले से प्रकाशित, साभार प्रेषित है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद और 2016 की हत्या के मामले में पांच अन्य लोगों को क्लीन चिट दे दी है। ध्यान हो कि 4 नवम्बर 2016 को सूकमा जिले के तोंगपाल थाना के ग्राम सोतनार नामपरा में एक ग्रामीण की हत्या हो गई थी। तब इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने वाली मृतक की पत्नी ने भी कहा था कि वह आरोपियों को नही जानती। घटना के कुछ दिनों बाद आदिवासियों पर अत्याचार की जांच के लिए पहुंचे नन्दनी सुंदर, अर्चना प्रसाद, विनीत और संजय को भी इस मामले में लपेट कर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तत्कालीन आईजी ने स्थानीय पुलिस को मजबूर किया था। इस मामले को लेकर तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार की पूरे देश मे किरकिरी हुई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर गिफ्तारी पर रोक लगा दिया था।
“हमें उम्मीद है कि सभी सामान्य निर्दोष आदिवासी भी उसी न्याय का अनुभव करेंगे जो हमें मिला है और उनके खिलाफ आरोप बहुत जल्द हटा दिए जाएंगे।”
नंदनी सुंदर।
    सोमवार को सुकमा की स्थानीय अदालत में दायर चार्जशीट में, पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान नंदिनी सुंदर, जेएनयू के प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, विनीत तिवारी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता संजय पराते के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। सुकमा में पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला ने दिल्ली के एक अखबार (हिंदुस्तान टाइम्स) को कहा है, “जांच के बाद पुलिस को नंदिनी सुंदर और अन्य चार के खिलाफ तोंगपाल हत्याकांड में कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला है। ग्रामीणों के बयान लिए गए जिससे पता चलता है कि वे हत्या के समय मौजूद नहीं थे। इसलिए, हमने उनके खिलाफ मामले वापस ले लिए हैं।”
केस दर्ज होने के बाद बस्तर से बाहर स्थानांतरित किए गए कल्लूरी और अब राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के प्रमुख के रूप में तैनात हैं, ने इस मामले में अभी तक किसी प्रकार का बयान नही दिया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर नंदिनी सुंदर ने एक समाचार पत्र को दिए बयान में कहा कि पुलिस ने बेतुके सिद्धांतों को जारी रखने के बजाय सबूतों के अनुसार सही काम किया है। शुरू से ही यह स्पष्ट था कि यह मामला प्रतिशोधात्मक था, सीबीआई द्वारा ताड़मेटला में हिंसा के लिए विशेष पुलिस अधिकारियों को चार्जशीट किए जाने के लगभग तुरंत बाद बदले की भावना के तहत दर्ज किया गया था।

*सूत्र।

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