किसके इशारे पर हो रही है साज़िश…?

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भगवा संगठनो के प्रदर्शन के दौरान एक सीनियर पुलिसकर्मी शहीद हो गया…? ज़िले और प्रदेश में क़ानून व्यवस्था ठीक रखने के लिये पुलिस लगातार कोशिश कर रही है। लेकिन सुदर्शन टीवी के सुरेश चव्हाणके सोशल मीडिया के ज़रिये प्रदेश का मौहल ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं।
वह पुलिस पर भगवा संगठनों के किये गये हमले को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि बुलंदशहर में कोई साम्प्रदायिक संघर्ष हुआ ही नहीं है। गोकशी के कथित मामले में वहाँ विरोध प्रदर्शन किया गया, जो बाद में हिंसक हो गया। जिसमें एक इंस्पेक्टर शहीद हुआ व एक अन्य आदमी की मौत हो गई है।
पुलिस के मुताबिक, 12 अप्रैल 2017 को भी सुरेश चव्हाणके पर समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और अफ़वाह फैलाने के आरोप में लखनऊ से गिरफ़्तार किया गया था। उन पर संभल में भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 259ए और 505 (1ए) के तहत मामले दर्ज हुए थे।
ऐसे में फ़र्ज़ी ट्वीट्स और पोस्टस सिर्फ़ महौल ख़राब करने के लिए साज़िश के तहत किये जाते हैं। उत्तर प्रदेश प्रशासन को तुरंत सुरेश चव्हाण को रासुका के अंतर्गत गिरफ़्तार कर कार्यवाही करना चाहिये है। क्यूँकि कोई कितना भी रसूखदार हो, देश की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ करने वाले को कठोर सज़ा होना ही चाहिए। यह हिंसा करवाने वालों के लिए एक सबक़ होगा।

(असद रिजवी के फेसबुक वॉल से।)

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