Chhattisgarh

विधानसभा चुनाव में रुपयों की लालच देकर 200 डमी प्रत्याशी खड़ी किए और चुनाव के बाद तबाह कर देने की दी धमकी !

छत्तीसगढ़ प्रदेश की सियासत भी अब यूपी/बिहार से भी बदतर की ओर अग्रसर हो चुका है। प्यार और जंग में सब जायज है की तर्ज में चुनाव में जीत चाहे जैसे भी हो जितना जरूरी है के लिए इसमें साम-दाम, दण्ड-भेद की नीति अपनाई जा रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में वोट काटने के उद्देश्य से अमूमन सभी राजनीतिक दल अनेकोंनेक उपाय अपनाते हैं। इसी के तहत रायपुर में एक अखबार “जनता से रिश्ता” के मालिक पप्पू फरिस्ता ने ऐसे ही एक डमी प्रत्याशी को रुपयों का लालच देकर चुनाव में उतारा और चुनाव पश्चात उस प्रत्याशी को अश्लील गलियों से नवाजे जाने के बाद तबाह कर देने की धमकी भी दे डाली !
रायपुर में निर्दलीय चुनाव लडने वाले एक प्रत्याशी ने कांग्रेस नेता पप्पू फरिश्ता के खिलाफ पुलिस में जान से मारने की धमकी और धोखाधडी करने की लिखित शिकायत पुलिस के आलाधिकारियो से की है।
पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
         पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक छोटापारा इलाके में रहने वाले इलियास हुसैन ने रायपुर रेंज आईजी और एसएसपी से लिखित शिकायत की है, जिसमें आरोप लगाते कहा गया है कि, कांग्रेस नेता और जनता से रिश्ता अखबार के मालिक पप्पू फरिश्ता ने छत्तीसगढ़ विधानसभा 2018 में निर्दलीय चुनाव लडने के लिए तीन लाख रूपये देने का लालच देकर चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बनाया और चुनाव से पहले सिर्फ 71 हजार रूपये देते हुए बाकी पैसे चुनाव के बाद में देने का आश्वासन दिया लेकिन जब बाकी पैसे मांगने पर पप्पू फरिश्ता और उसके साथी कर्मचारी शाहरूख खान के द्वारा मोबाइल पर परिवार समेत तबाह करने की धमकी देते हुए आइंदा पैसे के लिए फोन नही करने की धमकी देते हुए गंदी-गंदी गालियां दी। अपने शिकायत आवेदन में इलियास हुसैन ने आरोप लगाते हुए बताया कि पप्पू फरिश्ता द्वारा पूरे रायपुर जिले में करीब 200 निर्दलीय प्रत्याशी खडे किये थे और सबको पैसे देने का लालच दिया था जिसमें से किसी को भी कोई पैसे नही दिये गये है। फिलहाल पुलिस के आलाधिकारियो ने सिविल लाइन थाने को इस शिकायत का जिम्मा सौंपा है जिसमें पुलिस ने इलियास हुसैन और पप्पू फरिश्ता के बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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