Chhattisgarh

कवासी लखमा गद्दार और धोखेबाज : माओवादी। दादी ने दी सफाई…?

रायपुर (hct)। नक्सलियों ने मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ आरोप लगाए हैं, उन्होंने लखमा को गद्दार और धोखेबाज बताया है। नक्सलियों की दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी के सचिव विकास के नाम से जारी प्रेस विज्ञप्ति में इस बात का उल्लेख है कि कोत्तागुड़ा मुठभेड़ फर्जी है, और उसकी उसकी घोर निंदा किया है।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी के सचिव विकास की ओर से जारी पत्र।
विकास की ओर से जारी इस प्रेस नोट में इस बात का विशेष उल्लेख है कि सुकमा जिलान्तर्गत चिंतलनार पंचायत के गांव कोत्तागुड़ा के ग्रामीण; गांव के गायता (पुजारी) को चुनने के लिए परंपरागत शिकार करने जंगल गए थे जहाँ गश्त पर निकले डीआरजी के जवानों ने निर्दोष ग्रामीणों पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर तीन ग्रामीणों की निर्मम हत्या कर दी।
जारी प्रेसनोट में कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सीधा-सीधा भूपेश सरकार पर हमला किया है और लिखा है कि सरकार अपने चुनावी वादे को भूलकर पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के नक़्शे-कदम पर चल रही है। वहीं कवासी लखमा को आदिवासियों का हितैषी होने का ढिंढोरा पीटने वाला ढोंगी, गद्दार और धोखेबाज बताया है। इस पत्र में आगे लिखा है, कवासी लखमा सत्ता में बैठते ही जल जंगल जमीन व संसाधनों को कौड़ियों के भाव देशी विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए स्वयं उद्योग मंत्री बन बैठे हैं।
विज्ञप्ति में उन्होंने लखमा पर फर्जी मुठभेड़ को अंजाम देने वाले पुलिस कर्मियों को आउट आफ टर्न प्रमोशन दिलवाने का आरोप लगाया है। माओवादियों के सचिव ने लिखा है, आदिवासियों को दहशत में डालकर खनन परियोजनाओं जैसे नंदराज पहाड़ से लेकर उत्तर में हाहलादी, मानपुर तक एवं वृहद बांध परियोजनाओं को शुरु कराने के लिए ही फर्जी मुठभेड़ों व गिरफ्तारियों, गांवों पर हमलों, अत्याचारों, जनता की बेदम पिटाई का सिलसिला जारी है। सुकमा एसपी ने नक्सलियों के इस पर्चे को उनकी बौखलाहट करार दिया है।

दादी ने दी सफाई कहा – “जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों को दो महीने के अंदर छुडवाएंगे।”

कवासी/भूपेश
पत्र जारी होने के दूसरे ही दिन कवासी लखमा ने सफाई देते हुए कहा कि “चुनाव से पहले मैंने जेल में बंद आदिवासियों को छुड़ाने का वादा किया था, लेकिन चुनाव के चलते थोड़ा वक्त लग गया, लेकिन, अब मैं जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों को दो महीने के अंदर छुडवाउंगा। चाहे इसके लिए उन्हें प्रदेश के मुखिया से लड़ाई भी करनी पड़े तो वे तैयार हैं।”

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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