सीआईडी ने कोर्ट में मामला पेश तो किया, मगर बलात्कार की धारा ही गायब !

रायपुर। पुलिस को सूचना मिली थी कि, बस्तर से वीरसाय का दस्ता पैदल लौट रहा है, और चांदो के पास नदी पार कर झारखंड जाएगा। सूचना मिलने पर पूरे दलबल के साथ वे रात करीब साढ़े तीन बजे घटनास्थल पर पहुंचे तो पुलिस पार्टी पर फायरिंग होने लगी। जवाबी फायरिंग की गई तो माओवादी अँधेरे का फायदा उठाकर नदी किनारे से लगे जंगल में भाग गए। पुलिस को एम्बुश की जगह पर घायल अवस्था में एक लड़की मिली। उसने पीने के लिए पानी माँगा और पूछने पर अपना नाम “मीना खलखो” बताया। इस पूरे घटनाक्रम को एफ़आइआर क्रमांक 25/11 में दर्ज अनुसार पुलिस पर नक्सलियों ने हमला किया और बचाव में पुलिस ने गोलियां चलाई। मीना को पुलिस ने हार्डकोर नक्सली बताया था। पुलिस ने दावा किया था कि; माओवादियों के साथ दो घंटा मुठभेड़ चली, इस दौरान मीना भी गोलियां चला रही थी; लेकिन पुलिस ने उसे मार गिराया। खलखो प्रकरण सरगुजा के बलरामपुर जिले के चांदो थाने का है।
पुलिस की यह कहानी बड़ी ही पेचीदा निकली। उरांव आदिवासियों वाले इस गांव के सारे लोग एक सुर में पुलिस की इस झूठी कहानी के ख़िलाफ़ खड़े हो गए। चांदो करचा मार्ग पर नवाडीह गांव के जिस नदी के किनारे पुलिस ने मुठभेड़ दर्शाया था वहां के रहवासियों ने बताया कि उस रात उन्होंने केवल तीन गोलियों की आवाज ही सुनी थी। गांव वालों का कहना था कि मीना गांव में बकरियां चराती थीं और उनका माओवादियों से कोई लेना-देना नहीं।
मीना खलखो चांदो से करीब 5 किलोमीटर दूर बसे गांव करचा की थी। मीना की मां के अनुसार – वह एक आम घरेलु लड़की थी। उसे बकरियां चराने के अलावा साइकिल चलाना बहुत पसंद था। घटना वाले दिन भी वह शाम को तैयार होकर साइकिल से नदी के पास जाने की बात कहकर निकली थी, पर रात को नहीं आई। सुबह परिजनों को पता चला कि मीना को गोली लग गई है और उसे बलरामपुर अस्पताल ले जाया गया है। मीना के पिता जब बलरामपुर पहुंचे तो उनकी लड़की की मौत हो चुकी थी।
मीना खलखो का यह प्रकरण तब और पेचीदा हुआ जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया था कि मीना को बेहद नजदीक से गोली मारी गई है, यही नहीं उसके साथ दुष्कर्म भी किया गया था। पुलिसकर्मियों ने मीना का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे मौत के घाट उतार दिया। आरोपियों में चांदो थाना के तत्कालीन प्रभारी, उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक, ललित भगत, महेश राम, विजेंद्र पैकरा, इंद्रजीत, पंचराम ध्रुव, श्रवण कुमार, भदेश्वर राम, मोहन जाटव, मनोज कुमार सहित उनके साथ रहे छत्तीसगढ़ सशस्त्र पुलिस की 12वीं और 14वीं बटालियन के सिपाही शामिल हैं शुरुआती जांच के बाद राज्य सरकार ने आरोपी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था।
जिस मीना खलखो को नक्सली बताकर मार डाला गया, अब उसी प्रकरण में छत्तीसगढ़ पुलिस ने शातिराना खेल कर दिया है। पीएम रिपोर्ट और उसके बाद हुई न्यायिक जांच में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि मीना के साथ नृशंस बलात्कार हुआ है। इस प्रकरण में जबकि सीआईडी ने कोर्ट में मामला पेश किया तो बलात्कार की धारा ही हटा दी गई ! मामले में तत्कालीन टीआई समेत तीन को अभियुक्त बनाया गया है जो जमानत पर है।
साभार : सूत्र

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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