सावधान: हो जाएं एनएच 153 की खतरनाक मोड़ एवं बिना सुरक्षा वाली पुल आपकी जान न ले ले

*लक्ष्मी नारायण लहरे (कोसीर)

सारंगढ़ से सरायपाली के मध्य 40 किलोमीटर की दूरी में सफर करना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है वह भी पीडब्ल्यूडी विभाग की लापरवाही से कहने में कोई अतिसंयोक्ति नही होगी क्योंकि यदि आप सारंगढ़ से सरायपाली मार्ग में जैसे ही आगे बढ़ेंगे तो सबसे पहले घोघरा नाला में अंग्रेज जमाने की पुल पहले मौत की दरवाजे के रूप में खुलेगी जिसकी चौड़ाई देश आजाद होने के 70 साल बाद भी जस के तस है अक्सर यहां चार पहिया वाहन जाम हो जाती है।

स्कूली बच्चों के पढ़ाई शुरू होने एवं छुट्टी होने के दौरान यह पुल भारी वाहनों की आवाजाही से अधिक खतरनाक हो सकता है थोड़ी सी हड़बड़ी में जान चली जायेगी जबकि दूसरा मौत का दरवाजा पुटका नाला की निचला नाला है यह पुल बरसात में अत्यधिक बारिश होने से डूब जाती है एक मात्र रास्ता होने से लोग पुल से 3 फिट पानी ऊपर होने पर भी अपने वाहन के साथ पा करने का प्रयास करते हैं जिससे जान पर जोखिम बना रहता है, वहीं तीसरा एवं चौथा मौत का मोड़ परसा नाला एवं औरा जोरी नाला में बने पुल व खतरनाक मोड़ हैं।

अक्सर कैप्सूल वाहन चलते चलते थोड़ी स्पीड हुई तो सीधे पलटी हो जाती है ये दोनों पुल भी तेज बारिश के साथ डूब जाती है इससे आगे बढ़ेंगे तो कनकबीरा के पास बांजी नाला का पुल और खतरनाक मोड़ तो सीधे आपका यमराज बनकर मानो इंतजार ही कर रही हो क्योंकि यहां दुर्घटना महीनों या साल में नही हर सप्ताह होती है जहां न जाने कितने लोगों की जान चली गई है और कितने लोग बुरी तरह से घायल भी हो चुके है लेकिन इतनी दुर्घटना एवं मौत के बाद भी पीडब्ल्यूडी विभाग नींद से नही जाग पाई है।

एन एच 153 में अब तक कई वर्ष बीत गये लेकिन 40 किलोमीटर की दूरी में मंदिर अस्पताल खतरनाक मोड़ संकरा पुल से संबंधित सावधान करने वाला कोई बोर्ड नही लगाया है और न ही कहीं पर भी किसी पुलिया में सुरक्षा दीवाल बनाया गया जिसकी वजह से इस सड़क में पहली बार सफर करने वाले अधिकांश वाहन चालक अचानक आने वाली मोड़ में धोखा खा जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो कर मौत की मुह तक पहुँच जाते हैं कनकबीरा के ही बांजी नाला पुल एवं खतरनाक मोड़ में कई गाड़ियां गिर चुकी हैं पिछले महीने इस पुल में गिरने से एक युवक की मौत हो चुकी है जबकि इस महीने एक मारुति वेन ,आल्टो कार व मोटरसाइकिल गिर चुकी है वहीं बीते बुधवार को शाम 6 बजे जान लेवा मोड़ ने मजदूरी कर अपने घर वापस लौट रहे दंपति को अपना निवाला बनाने का प्रयास किया और ये दोनों अभी गंभीरावस्था में रायगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती हैं जिनका इलाज चल रहा है इस पुल में सुरक्षा घेरा करने हमने पीडब्ल्यूडी के एसडीओ श्री ध्रुव को मोबाईल के माध्यम से विशेष आग्रह किया था लेकिन इन लापरवाह अधिकारियों ने लोगों की जान बचाने वाले सचेतक बोर्ड लगाने के प्रयास किये और न ही लकड़ी का सुरक्षा घेरा लगाया है जिसकी वजह से यहां हर सप्ताह एक दुर्घटना घटित हो रहीं हैं।

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