Judiciary

“मॉब लिंचिंग (उन्मादी भीड़ की हिंसा)” मामलों पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इंकार।

एक तरफ देश एक बुरी “अवसाद” से ग्रस्त उन्मादी भीड़ में तब्दील गुटों की हिंसा से ग्रस्त *(मॉब लिंचिंग) होकर आए दिन एक न एक घटनाओं को अंजाम दे रहा है वहीं ऐसे समय में उक्त मामलों पर तुरंत सुनवाई वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि *“संबंधित मामले की जल्‍द सुनवाई नहीं की जा सकती, समय आने पर ही सुनवाई होगी।”

*नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मॉब लिंचिंग मामले पर तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, समय आने पर इस मामले की सुनवाई होगी। बता दें कि मॉब लिंचिंग मामलों पर तात्‍कालिक सुनवाई के आग्रह के साथ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
मॉब लिंचिंग का ताजा मामला झारखंड के सरायकेला के खरसावां में चोरी के शक में ही भीड़ ने 24 साल के मुस्लिम युवक को इतना पीटा था कि उसकी मौत हो गई थी। दूसरा मामला त्रिपुरा का है, जहां के धलाई जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास एक गांव में मवेशी चोरी के शक में भीड़ ने 38 साल के शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी।
सूत्र : *एएनआइ।

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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