*विनोद नेताम

बालोद। एक तरफ प्रदेश के गृहमंत्री छत्तीसगढ के कोने-कोने घुम-घुमकर छत्तीसगढ के पुलिस को बेहतर बनाने की कोशिश में दिन-रात जुटे हुए हैं वही गृहमंत्री श्री साहु लगातार छत्तीसगढ के पुलिस विभाग को चेतावनी समय-समय पर देते रहे है, कि शिकायत मिलने पर तुरंत कार्यवाही किया जाये और दोषी पाये जाने पर दण्डित। लेकिन बालोद जिला के एक शिक्षक जो पूर्व मे सरपंच भी रह चुका है, जो व्यक्ति अपने जीवन काल मे समाज के महत्वपूर्ण कार्यो मे अपना योगदान दिया है उसे न्याय के लिए भटकता देख हमे भारत के एक मुख्य न्यायाधीश की बात याद आ गई देर से मिला हुआ न्याय कोई काम की नही और सच में देखा जाय तो कथन पूर्णरुप से सही घर जलने के बाद कुंआ खोदने का क्या मतलब जिस शिक्षक और पूर्व सरपंच के ज्ञान और अनुभव का लाभ समाज अपनी बेहतरी के लिए उठा सकता था उसका उपयोग समाज में व्याप्त स्वार्थियो ने कर लिया।

एक शिक्षक समाज मे इतना ज्ञान भरता है, की समाज ज्ञान रुपी प्रकाश से सालो तक जगमाते रहता है। एक सरपंच की कार्य योजना गांव की बदहाली बदकर आदर्श गांव की नीव रखता है, लेकिन प्रशासन की नाकामी के चलते अगराहिज नागवंशी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि – मेरे द्वारा पुलिस थाना गुरूर से संबंधित सुचना के अधिकार के तहत जांच अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी पुलिस बालोद को जानकारी मांगी गई थी। लेकिन जनसूचना अधिकारी बालोद द्वारा भ्रामक एवं अपूर्ण जानकारी दिया गया था। जिसके खिलाफ मैंने प्रथम अपीलीय अधिकारी पुलिस अधीक्षक बालोद के समक्ष आवेदन पेश किया जिसमे पूरी जानकारी मिली।

जांच अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन मे पोषण सोनी, गीता बाई को पत्नी बनाकर रखा है तथा दोनो ने दिनांक 18/4/2016 को थाना गुरूर में एवं अनुविभागीय दण्डाधिकारी बालोद में शपथ कथन किया है। जांच प्रतिवेदन मे स्पष्ट उल्लेख है किन्तु जांच अधिकारी द्वारा अप्रमाणित उल्लेख किया गया है। थाने जांच अधिकारी द्वारा अपराधियो से मोटी रकम लिया होगा। इसलिए कार्यवाही नही किये। पोषण सोनी की पत्नि त्रिवेणी सोनी ने गीता नागवंशी को रखैल रखा हुआ है तथा ग्राम विकास समिति अरमरी कला मे आवेदन देकर फैसला करने निवेदन किया था। फैसला के लिए पूछा गया तब मै इंकार कर दिया क्योंकि सन् 2015 में साहु समाज के लड़का द्वारा अंतरजातीय की लड़की को लाये है। उनका फैसला ने ही किया। गांव में फैसला नही हुआ। मै क्यो फैसला दूंगा। इस बात को नारद राम साहु से पूछा क्योंकि बैठक में उन्होने पूछा था। मेरे द्वारा इंकार करने पर नारद राम साहु अपनी प्रतिष्ठा मानकर दिनांक 29/7/2016 को षड़यंत्र किया गया। जिसे ए एस आई धरम भूआर्य द्वारा दिनांक 12/2/2018 एवं जांच अधिकारी पुलिस अनुविभागीय बालोद द्वारा दिनांक 25/04/2018को उल्लेख कर विवरण दिया गया है।

वही थाना गुरूर के ए एस आई धरम भूआर्य एवं जांच अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। वह एक लोक सेवक है। जांच के दौरान अगराहिज नागवंशी एवं भीष्म सिंह नागवंशी को गाली गलौच व थाने में बंदकर बेदम पिटाई की बात कही है तथा जांच में गवाह ने अपने बयान में उपरोक्त बातो को दिये है। सूचना के अधिकार में जांच अधिकारी बालोद द्वारा गवाह का कथन एवं ए एस आई धरम भूआर्य का कथन की कापी तथा गीता बाई नागवंशी एवं पोषण सोनी का कथन एवं अनुविभागीय अधिकारी बालोद का आर्डर शीट दिया गया था। इस कारण सूचना के अधिकार में प्राप्त दस्तावेज में अपूर्ण जानकारी लिखा गया था। इस तरह थाना गुरूर एवं जांच अधिकारी बालोद द्वारा गुमराह एवं भ्रमित कर छुपाया गया। एक बुजुर्ग रिटायर शिक्षक तथा सरपंच रहकर अपने कर्तव्यो का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन किया है तथा समाज में नि:स्वार्थ सेवा कर समाज में सम्मान पा चुका है। ऐसे कर्तव्यनिष्ठ एवं समाज सेवक की बिना सूचना दिये बुलाकर धमकी देना और लाकअप में बंदकर पिटाई की धमकी देना गुरूर के ए एस आई धरम भूआर्य के फितरत में लिखा है।

दिनांक 28/12/2017 को धरम भूआर्य ए एस आई गुरूर ने बताया था कि मैं शिक्षाकर्मी को छोड़कर पुलिस विभाग में आया हुं। इसलिए पुलिस विभाग में आकर वर्दी का धौंस दिखाते हुए बिना जांच पड़ताल के केस डायरी बनाना एवं केश चालान पेश करना थाना गुरूर का ऐतिहासिक कार्य रहा है। थाना गुरूर के ए एस आई धरम भूआर्य के कारण हमारे घर में फूट पड़ने की कगार में है। क्योकि मेरे पुत्र के सामने मुझे चुपचाप घर बैठने एवं बच्चो को बंटवारा देने की बात कहा है अर्थात किसी के घर को फोड़ने व क्षति पहुचाने का ठेका ए एस आई धरम भूआर्य, गुरूर ने लिया है। इसी प्रकार से झुठे प्रपंच व साजिश करके अपराध क्रमांक 471 दिनांक 10/12/2017 बिना कारण के दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया है। यहा तक डांट फटकार कर नागरिक के अभिव्यिक्त की स्वतंत्रता पर बाधा पहुंचाकर प्रकृति की खुली हवा को सांस लेने में बंद कर दिया। इसी कारण से जुलाई 2016 अगस्त सितंबर 2016 में गुरूर पुलिस द्वारा प्रताडि़त किया जाता रहा है।

दिनांक 13-14-15/04/2016 एवं दिनांक 18/04/2016 को थाना गुरूर के पास सारे दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद थाना गुरूर द्वारा पुलिस हस्ताक्षेप अयोग्य अपराध मानकर कोई कार्यवाही नही की। इस प्रकार धारा 154 को धारा 155 मानकर गुरूर पुलिस बचाती है और धारा 155 को धारा 154 बताकर कार्यवाही करती है। दिनांक 14/4/2016 एवं 18/4/2016 को थाना गुरूर में गीता बाई नागवंशी एवं पोषण लाल सोनी का कथन किया गया है तथा अनुविभागीय दण्डाधिकारी बालोद में दिनांक 18/4/2016 को दोनो व्यक्तियो का कथन लेकर उक्त कथन एवं आर्डरशीट को थाना गुरूर में वापस करने के साथ थाना प्रभारी को निर्देशित किया है, कि उक्त कृत्य विधी विरूध्द है और कार्यवाही किया जावे इसके बावजूद कोई कार्रवाई नही किया। दिनांक 13/01/2018 ए एस आई धरम भुआर्य अरमरी कला आकर केश चालान पेश करने संबंधी कोटवार पुत्र द्वारा सुचना भिजवाकर गरीबा गंगबेर पुरूषोतम,नारद राम, रामजी पंच रेणुका पंच,पोषण, ओमप्रकाश शर्मा, संतोषी शर्मा, तीजू राम, सुभाष मिश्रा सरपंच कोसागोंदी एवं भूआर्य द्वारा साजिश रचा गया और दिनांक 14/01/2018 को गीता बाई नागवंशी हमारे घर आकर आतंक मचाकर गाली गलौच किया गया। उषा नागवंशी ने दिनांक 14/01/2018 को थाने गुरूर में गीता नागवंशी की शिकायत करने गई थी किन्तु रिपोट नही लिखी गई तब लिखित आवेदन दिया परन्तु पावती नही दिया और धरम भूआर्य अपने कथन में शिकायत करने नही आई थी तथा मुझे किसी भी प्रकार की लिखित नही मिली है। इससे स्पष्ट होता है कि दिनांक 13/01/2018 को ए एस आई धरम भुआर्य का अरमरीकला आकर साजिश करना और दिनांक 14/01/2018 को गीता बाई नागवंशी को भेजकर सुनियोजित षड़यंत्र किया गया।

इस तरह ए एस आई धरम भुआर्य को बचाने अधिकारीयो का संरक्षण प्राप्त है। सूचना के अधिकार के अंतर्गत दस्तावेज प्राप्त करने पर मालुम होता है कि गुरूर पुलिस हिस्ट्रीशीटरो का उपयोग कर अपराधियो को बचाया जाता है और निर्दोष लोगो को फंसाया जाता है। जिससे पैसे का लेनदेन स्पष्ट रहता है तथा शिकायतकर्ता के आवेदन पर जांच होने पर झूठ बोलने की आदी मनगढंत शिकायत करने का आदि लिखा जाता है। पुलिस के ऐसे ही कृत्य समाज में अपराध को बढावा मिलती है गांव के नारद राम साहू द्वारा ही गांव में विवादित बातो को उकसाने व भड़काने का कार्य करता है और इस प्रकार के कृत्य कर जीवन यापन का जरीया बना लिया है। पुलिस का संबंध अपराधियो के साथ है और अपराधियो का संबंध पुलिस से है इसलिए अपराधियो का हौसला बुलंद रहता है क्या ईमानदारी पूर्वक काम करना या आदीवासी होना अपराध है या फिर न्याय की गुहार लगाना गलत है। इस पर तत्काल कार्यवाही कर न्याय दिलाई जाये।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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