किरीट ठक्कर
गरियाबंद। दिव्यांग होते हुये भी कोमलचंन्द्र वर्मा अपने नागरिक अधिकारों के प्रति सचेत है, यही कारण रहा की अपने साथ हुये दुर्व्यवहार के विरुद्ध उन्होने आवाज उठायी और अपना हक पाया।
दरअसल ग्राम कुकदा के रहने वाले युवक कोमलचंन्द्र वर्मा एक बस दुर्घटना के बाद 80 प्रतिशत विकलांग हो चुके है, इसी आधार पर उन्हे, सहायक संचालक सचिव क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार कार्यालय गरियाबंद से निशुल्क यात्री पास जारी किया गया है।
परिवहन विभाग के नियमानुसार इस निशुल्क पासधारी व्यक्ति को बस किराये में 100 प्रतिशत छुट होती है, बस संचालक ऐसे पासधारी बुजुर्गो, दिव्यांगजनों से पास दिखाने पर किराये की राशि नही ले सकते, किन्तु मार्च माह में कोमलचंन्द्र वर्मा से कुछ बस संचालकों ने पास दिखाने के बावजुद ना सिर्फ पूूरा किराया वसुल लिया, अपितु परिवहन विभाग द्वारा जारी पास को मानने से इंकार दिया।
बकौल कोमल वर्मा के उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया ! रायपुर से देवभोग रुट की दो बसों में कोमलचंन्द्र वर्मा के साथ ऐसा ही व्यवहार किया गया, इन बस परिचालकों की मनमानी तब बढ गयी, जब अगले दिनों में पोंड से गरियाबंद के लिए कोमल को बस में बिठाने से ही मना किया जाने लगा, पिछली बस में चले आना कहकर बस आगे बढा दी जाती थी।
दिव्यांग कोमल चंन्द्र वर्मा।
कोमलचंन्द्र वर्मा ने इसकी शिकायत कलेक्टर सहित परिवहन कार्यालय में की, 30 अप्रैल सुधि पाठकों के सुपरिचित वेब पोर्टल “हाईवे क्राइम टाईम” में कोमल के साथ हुये दुर्व्यवहार की खबर को प्रमुखता से प्रसारित किया था।

(https://highwaycrimetime.in/archives/2671)

दो बसों पर चालानी कार्यवाही व भविष्य में परमिट निलंबन की चेतावनी

कोमल वर्मा की शिकायत पर जिला परिवहन अधिकारी गरियाबंद द्वारा कार्यवाही करते हुये वाहन क्रमांक सी जी 04 ई ए 0479 तथा सी जी 06 डी 9944 के परिचालकों द्वारा किये गये दुर्व्यवहार व जिला परिवहन कार्यालय द्वारा जारी निशुल्क यात्री पास अस्वीकार करने की वजह दोनो बसों के विरुद्ध ढाई -ढाई हजार रुपये की चालानी कार्यवाही की गई तथा जिले मे संचालित समस्त बस संचालकों को हिदायत दी गई की भविष्य में इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर परमिट निलंबन / निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकेगी।

 

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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