सोशल मीडिया में एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो की अभी तक तो यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह कहाँ से प्रेषित किया गया है, लेकिन इसमे जो देखने को मिल रहा है वह मन-मस्तिष्क को झंझोड़ देने वाला है।
एक चीता जंगल से भटकते-भटकते शहर के करीब पहुंच गया, शहर से लगे दूर के इलाके में उसकी मुठभेड़ आवारा कुत्तों के दल से हो गई। अब तक होता यह था कि चीता जैसा सबसे फुर्तीला और खूंखार जानवर, किसी भी अन्य जानवरों की दम छुड़ा देता है; लेकिन इस बार चीता पर कुत्ते भारी पड गए।

आप वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह आवारा कुत्तों के दल ने जोकि संख्या में दर्जन भर होंगे दिख रहे हैं, ने चीता पर हमला करके उसे जगह-जगह से नोंच डाला और उसे घायल कर दिया ! एक चीता पर तकरीबन दर्जन कुत्ते भारी पड गए और अंतत: संघर्ष करने के बाद चीता ने दम तोड़ दिया।
उक्ताशय को लेकर जब “हाईवे क्राइम टाईम” ने जिम्मेदार लोगों से बातचीत कर कारण जानने का प्रयास किया तो लोगों के अनुसार यह स्थिति इसलिए पैदा हुई, विकास के नाम पर विनाश की जो इबादत लिखी जा रही है; वह बेहद भयावह है क्योंकि नदी-नाले, सूखते जा रहे हैं, पानी की तलाश और जंगल और पहाड़ों पर उद्योगपतियों का कब्जा भविष्य में प्रत्येक जीवधारियों के लिए जानलेवा होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में जानवर कहां जाएं…?

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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