रायपुर (hct)। जनसेवकों के सामने बड़ी अजीब विडंबना निर्मित हो जाती है जब तब उस दल/पार्टी के मुखिया पर कोई तंज फिट बैठ जाए, और उसके स्वामिभक्त को नागवार गुजरे अथवा वो यह दिखाना चाहे कि वही है उस मुखिया के सबसे बड़े स्वामिभक्त। देश के पहले जुमलेबाज प्रधानमंत्री को इस परिपाटी को चलन में लाने का श्रेय जाता है। उनके जुमलेबाजी का कहीं कोई सानी नहीं ! अचानक कब क्या कह जाए कोई भरोसा भी नहीं। अब देखिए न, उसने कब अपने आपको चौकीदार घोषित कर दिया और राफेल की चोरी पकड़ी गई तो “चौकीदार चोर है” का गुंजायमान समचे देश मे होने लगा ! स्वामिभक्त पार्टी के नालायकों ने सोंचा कि चौकीदार “चोर” बनकर देश मे प्रसिद्ध हो रहा है तो क्यों न हम भी अपने आपको इस प्रसिद्धि के दौड़ में शामिल कर लें और समूचे सेवकों ने अपने नाम/पद के पहले “मैं भी चौकीदार” जोड़कर अलीबाबा और चालीस चोर की जमात खड़ी कर बेचारे “चौकीदार” के पद को ही बदनाम कर डाला।
वैसे किसी ने सोंचा भी नहीं होगा कि वाकई में चौकीदार ही चोर निकलेगा। ये शायद विज्ञापन कंपनी वालो को न जाने कैसे गुमान हो गया था कि स्याला चौकीदार ही चोर निकलेगा …?
आप भी देख लीजिए क्योंकि शायद तब आपने ध्यान नहीं दिया होगा लेकिन ये तो हकीकत हो गया ! आप भी देख लीजिए…
अब आते हैं छोटा आदमी की ओर दरअसल भाजपा के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री (झोलाछाप) डॉ० रमन सिंह ने एक पत्रकारवार्ता के दौरान कांग्रेस द्वारा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी पर बनाये गए विडियो “आइना देखो मोदी जी” से जुड़े सवाल के जवाब में वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कह दिया कि “इतना छोटा आदमी है, इतनी छोटी-छोटी हरकत करता है, ये सिर्फ मज़ाक का पात्र बनेगा।”
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर अपना नाम ”छोटा आदमी भूपेश बघेल” कर दिया है। इसके बाद से प्रदेश भर में कांग्रेसी विधायक और कार्यकर्ता अपने नाम के आगे “हाँ मै भी छोटा आदमी हूँ” लिखकर सोशल मीडिया में वाइरल कर रहे है। अब इस नामुराद बीमारी का इलाज कब तक दिमाग मे रहेगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन असर जोरदार दिख रहा है।
भाजपा कार्यालय के सामने पर्चा लेकर खड़े कांग्रेसी विधायक मोहन मरकाम।
फिलहाल आपको बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि मैं एक किसान का बेटा हूं, और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि मैं ऐसा ही रहूं हमेशा, ताकि बस्तर से लेकर सरगुजा तक और रायपुर से लेकर सुपेबेड़ा तक हर किसान, आदिवासी, युवा और आम जनता के बीच मैं सहज उपलब्ध रह सकूं, आप “बड़े आदमी” बन गए थे; रमन जी, वह आपको ही मुबारक…
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