किरीट ठक्कर

पुराना विवाद बना हत्या का कारण।

गरियाबंद। कुल्हाड़ी घाट के सरपंच बनसिंग सोरी के जरिये 29 मार्च पुलिस को सुचना मिली की ग्राम पंचायत कुल्हाड़ी घाट के आश्रित ग्राम भाताडिग्गी के जंगल में रसिया नाला के समीप एक अज्ञात लाश जली पडी है। सूचना पर पुलिस ने रसिया नाला पहुंतकर पंचानों के समक्ष अज्ञात लाश की पंचनामा कार्यवाही की, पंचनामें के दौरान ही पंचान उदेराम सोरी द्वारा मृतक के शव को देखकर अपने छोटे भाई सुकदेव सोरी पिता अधिराम सोरी उम्र लगभग 33 वर्ष के रुप में पहचान किया गया।
मृतक : सुकदेव सोरी
जांच कार्यवाही के दौरान पता चला की मृतक सुकदेव होली के दिन 21 मार्च से ही अपने घर से लापता था। कुछ चश्मदीद गवाहो द्वारा सुकदेव सोरी को अंतिम बार पुनीत राम सोरी व जयकुमार सोरी के साथ लडाई-झगडा करते देखा गया था। पुलिस ने पुनीत राम सोरी व जयकुमार दोनो सगे भाईयों को हिरासत में लेकर प्रारंभिक पुछताछ की, किंतु दोनो भाई पुलिस को गुमराह करते रहे। कडाई से की गई पुछताछ में दोनो आरोपियों ने अपराध स्वीकार करते बताया की होली के ही दिन पुरानी रंजिश के चलते दोनो ने सुकदेव के साथ मारपीट की व उसके ही गमछे से गला दबाकर हत्या कर उसकी लाश कुल्हाड़ी घाट रसिया नाला जंगल में ले जाकर साक्ष्य छुपाने व मृतक की पहचान छुपाने की नीयत से लाश को जलाकर वही छोडकर भाग गये थे।
पुलिस अधीक्षक एम आर अहिरे एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन सिंह राठौर ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया की मृतक के साथ आरोपियों का पहले भी झगडा हो चुका था। आरोपियों के विरुद्ध थाना मैनपुर में अपराध क्रमांक 43/2019 धारा 302, 201, 34 आईपीसी कायम कर विवेचना में लिया गया है।
इस अंधे हत्याकांड की संपुर्ण विवेचना कार्यवाही में एसडीओपी मैनपुर पुलिस राहुलदेव शर्मा के नेतृत्व में थाना प्रभारी निरीक्षक बसंत बघेल उप निरीक्षक प्रेमशंकर ठाकुर सहायक उपनिरीक्षक अजय सिंह भागवत कंवर, प्रधान आ. विजय मिश्रा, आरक्षक मुरारी यादव, कन्हैया यादव का योगदान उल्लेखनीय रहा।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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