स्व. महेंद्र कर्मा के पुत्र को डिप्टी कलेक्टर बनाये जाने से कुछ सवाल उठ रहे हैं ..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में CM भूपेश बघेल जी ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री स्व. महेन्द्र कर्मा के पुत्र आशीष कर्मा को बिना PSC परीक्षा दिए ही डिप्टी कलेक्टर बना दिया ! उनकी योग्यता ये थी कि वे पूर्व कांग्रेसी मंत्री के बेटे हैं, जो 2013 में सुकमा में हुए नक्सली हमले में मारे गए थे। हालांकि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के उन्मूलन हेतु महेंद्र कर्मा जी के प्रयासों ? को कोई भुला नहीं सकता। वे एक धाकड़ नेता थे जो ‘बस्तर टाइगर’ कहलाते थे।
छग सरकार उन्हें शहीद का दर्जा देती है, तो हमें गर्व होता है। लेकिन उनके शहादत को कांग्रेस कितने बार भुनायेगी.? उनके शहादत के नाम पर एक ही परिवार को कितने बार सशक्त बनाएंगे..?
2013 में महेंद्र कर्मा शहीद हुए, उसी वर्ष उनकी पत्नी देवती कर्मा को विधायक प्रत्याशी बनाया गया और वो विधायक बनी। 2018 में उसी आधार पर पुनः प्रत्याशी बनी, लेकिन हार गई। कर्मा जी शहीद हुए, उनके बड़े बेटे दीपक कर्मा आज दन्तेवाड़ा नगर पालिका अध्यक्ष हैं। साथ ही प्रदेश कांग्रेस महासचिव भी…।
कर्मा जी शहीद हुए, उनका दूसरा लड़का छविंद्र कर्मा 2019 लोकसभा टिकट के दावेदार हैं। कर्मा जी शहीद हुए, आज उनका तीसरा लड़का डिप्टी कलेक्टर बन गया। कर्मा जी की एक पुत्री और है, शायद कल को कलेक्टर बना दी जाए, कोई आश्चर्य ना होगा।
शहादत के नाम पर एक ही परिवार को कितना और कितनी बार सशक्त करोगे मुख्यमंत्री साहब। PSC के लाखों प्रतियोगी डिप्टी कलेक्टर के एक पद के लिए सालों से मेहनत कर रहे हैं, क्या ये उनके साथ अन्याय नहीं है.? बेरोजगारी दूर करने का वादा करके सत्ता पर आए, क्या ये उन बेरोजगारों के मुँह पर तमाचा नहीं है…?
इस वर्ष PSC परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के 3 पद हैं, जिसमें से 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, बचा 1 पद सामान्य वर्ग के लिए है, क्या उस एक पद को पाने के लिये हमारे माँ-बाप को भी शहीद होना पड़ेगा…? या फिर कांग्रेसी..?
वहीं इस विषय पर मुखातिब होते हुए ‘भूपेंद्र सिंह’ ने सोशल मीडिया (व्हाट्सएप) पर  लिखते हैं –
स्व. महेंद्र कर्मा के पुत्र को डिप्टी कलेक्टर बनाये जाने से कुछ सवाल उठ रहे हैं ..
  1. क्या झीरम कांड के अन्य शहीदों के परिवारों को भी कांग्रेसी सरकार के तुष्टिकरण का लाभ मिलेगा या वे छले जाएंगे ?
  2. हजारों जाबांज जवान, नक्सलियों से सीधे लड़ते हुए शहीद हुए हैं। क्या उनके परिवारों को भी ऐसा ही लाभ मिलेगा या वे छले जाएंगे ?
  3.  बस्तर के सभी दलों के सामान्य जनप्रतिनिधि और आम आदिवासी भाई-बहन हर रोज माओवादी हिंसा से प्रभावित हो रहे हैं , क्या उन्हें यह लाभ मिलेगा या वे भी छले जाएंगे ?
  4. छत्तीसगढ़ के वे लाखों युवा जो सालों से प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद को अपनी योग्यता से प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं । क्या इन सब लोगों के साथ कांग्रेस सरकार का यह निर्णय अन्याय नही है ?
  5. कहा जा रहा बस्तर में कर्मा परिवार को लोकसभा एवं अन्य चुनावों से दूर कर उनकी राजनीति समाप्त करने के लिए षडयंत्रपूर्वक यह निर्णय लिया गया है, क्या यह सही है .?

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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