*भरत सोनी।

देश भर में कोरोना का कहर जारी है। सम्पूर्ण देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर लॉकडाउन किया गया है। वहीं देश भर की जेलों में निरुद्ध कैदियों की रिहाई के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका में पारित आदेश के तहत जेलों में निरुद्ध ऐसे विचाराधीन बंदी जिन्हे अपराध के लिए सात वर्ष या सात वर्ष से कम की सजा से दोष सिद्ध किया जा सकता है उन्हें उक्त आदेश के तहत छोड़ा जाना है, इन्हें पैरोल पर या अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाएगा। उक्त आदेश के परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य में भी माननीय उच्च न्यायलय के द्वारा केंद्रीय जेलों में निरुद्ध कैदियों की रिहाई का आदेश किया गया है जिसमे केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा जारी सूचि के अनुसार ऐसे विचाराधीन बंदी जिन्हें सात वर्ष या सात वर्ष से कम की सजा से दोष सिद्ध होने पर दण्डित किया जा सकता है उन्हें रिहा किए जाने का आदेश दिया गया है।

तिहाड़ जेल, दिल्ली के बाद फैसला लेने वाले छत्तीसगढ़ दूसरा राज्य

रायपुर (hct)। अंतर्राष्ट्रीय विपदा कोरोना के संक्रमण एवं बचाव के मद्देनजर प्रदेश की जेलो में बंद पंद्रह सौ कैदी रिहा किए जाएंगे। यह निर्णय राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की टेली कॉन्फ्रेंसिंग में छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक जिसमें शासन की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रत साहू, जेल विभाग के सचिव और अतिरिक्त महानिदेशक संजय पिल्लै इस बैठक में शामिल हुए थे में फैसला लिया गया है।

प्रदेश की जेलों में बंद प्रदेश के निवासी ऐसे कैदी जिनको किसी मामले में अधिकतम 7 साल की सजा दी गई अथवा दी जा सकती है; उन्हें कुछ शर्तों के साथ जेल से रिहा करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे बंदी जिनके मामले की सुनवाई चल रही हो उन्हें 30 अप्रैल तक निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत दी जाएगी। ऐसे बंदी जिन्हें 7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है और जेल में 3 माह या उससे अधिक की अवधि व्यतीत कर चुके हों उन्हें 30 अप्रैल तक पैरोल पर छोड़ दिया जाएगा।

इन बंदियों को अपना आवेदन अपने जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरण में जिला जज की ओर से नियुक्त किए गए विशेष जजों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, इसके बाद रिहा करने की कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश में इस फैसले से लाभान्वित होने वाले बंदियों की संख्या लगभग 1500 बताई गई है। कोरोना महामारी के चलते तिहाड़ जेल के करीब 3000 कैदी हाल ही में रिहा किए गए थे छत्तीसगढ़ यह निर्णय लेने वाला देश का दूसरा राज्य है।

माननीय उच्च न्यायलय के द्वारा SUO MOTO रिट पिटीशन में पारित अंतरिम आदेश के अनुपालन में केंद्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध ऐसे विचाराधीन बंदी जिन्हें 7 वर्ष या 7 वर्ष से कम की सजा से दोष सिद्ध होने पर दण्डित किया जा सकता है; उन्हें रिहा किए जाने हेतु सूचि जारी की है। उक्त सूची जिला विधिक प्राधिकरण कार्यालय में प्रेषित की जा चुकी है उक्त सूची में से कैदियों की रिहाई की अग्रिम कार्यवाही प्राधिकरण द्वारा की जाएगी
देखिए सूचि :-

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By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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