राजधानी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने हाल ही में उत्तर-पूर्व दिल्ली के इलाकों में हुए सांप्रदायिक दंगों से पीड़ित प्रभावितों के लिए राहत फंड एकत्रित करने का आह्वान किया है। माकपा द्वारा दिल्ली में दंगा पीड़ितों और प्रभावितों के लिए बड़े पैमाने पर राहत और पुनर्वास का कार्य संचालित किया जा रहा है। अतः यह फंड चेक/डीडी के जरिये “Communist Party of India (Marxist)” के नाम पर सीधे माकपा केंद्रीय समिति कार्यालय, ए के गोपालन भवन, 27-29, भाई वीरसिंह मार्ग, गोल मार्केट, नई दिल्ली-1 के पते पर भेजा जा सकता है।

माकपा राज्य सचिवमंडल द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि इन दंगों में अभी तक 153 लोगों के हताहत होने और सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है, जिसमें दोनों समुदायों के गरीब लोग ही हैं। अधिकांश असंगठित क्षेत्र के मजदूर हैं, जिनकी आजीविका और घरों को काफी नुकसान पहुंचा है।

माकपा ने आरोप लगाया है कि इन दंगों में संघी गिरोह का पूरा-पूरा हाथ था और यही कारण है कि उकसावे के लिए जिम्मेदार संघी नेताओं पर अभी तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है और इतने संवेदनशील मुद्दे पर होली का बहाना बनाकर संसद में चर्चा तक टाल दी गई है। माकपा ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोगों की जान-माल को हुए नुकसान की एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है और राहत कार्य को एफआईआर के साथ जोड़ दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार दंगा प्रभावितों को राहत पहुंचाने के प्रति संवेदनहीन हैं।

माकपा के छत्तीसगढ़ राज्य सचिव संजय पराते ने आम जनता से पार्टी राहत फंड में उदारतापूर्वक सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने बताया कि माकपा धार्मिक विश्वास के आधार पर भेदभाव किये बिना सभी दंगा पीड़ितों व प्रभावितों तक राहत पहुंचाने और उनका पुनर्वास करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि माकपा द्वारा पूरे प्रदेश में राहत फंड एकत्रित करने का अभियान चलाया जा रहा है।

माकपा नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ पार्टी के निम्न खाते में भी राहत फंड जमा किया जा सकता है और पार्टी को सूचना भेजी जा सकती है :

CPI(M), Chhattisgarh State Committee
Bank of Baroda, Pandri Branch, Raipur
Acc. No. 17380100002622,
IFSC code : BARBPAN0RAI

*संजय पराते
सचिव, माकपा, छग
(मो) 094242-31650

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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