Chhattisgarh

गुड़ेली : अवैध क्रशर प्लांटों पर प्रशासन की पकड़ ढीली। मामला कहीं आपसी सांठ-गांठ का तो नहीं…

गुड़ेली में प्रति दिन लाखों रुपये का शासन को लगा रहे है चुना।

*दिनेश जोल्हे  

रायगढ़। जिले के सारंगढ़ ब्लाक अन्तर्गत आने वाले प्रसिद्ध गौण खनिज ग्राम पंचायत गुड़ेली में कुछ दिनों से बंद होने की खबर आग की तरह फैली हुई हैं परन्तु वहीं कुछ दबंग खनन माफिया रात भर प्रति दिन खनन कर रहे है। पहले जिस तरह लोग मजदूरी कर के अपना रोजी रोटी कमाते थे, अब वह भी खनन माफियाओंं ने छीन लिया है।

दर्जनों पोकलेन और हाईवा के माध्यम से हो रहा है खनन जिससे सौकड़ों लोग पलायन करने को मजबूर हैं। आए दिन क्रशरों से निकलने वाली धूल और धुआं से दुर्घटना हो रही है जिसमें दर्जनों लोगों की जान भी जा चुकी है, परन्तु खननकर्ताओं और क्रशर माफियाओं को कोई फर्क नहीं पडता सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि शासन व संम्बन्धित विभाग ही कुछ कार्यवाही करने में पीछे रह जाते है जिससे यहां के लोगों का भगवान ही मालिक है।

बता दे की गुड़ेली टिमरलगा में एक भी वैध क्रशर चुना भट्टा नहीं है। जितने भी क्रशर चुना भट्टे है सभी अवैध है फिर भी शासन उन पर कार्यवाही नहीं कर पा रही हैं। दर्जनों क्रशर में लीज नहीं है मात्र सहमति से ही संचालित किया जा रहा है तथा  जिन क्रशरों का लीज है वह स्थान पर आज तक खनन नहीं किया जा सका है, वहीं पर्यावरण विभाग की तो क्रशर माफियाओं द्वारा वर्षों से धज्जियां उड़ा रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि पर्यावरण अधिनियम का बिना पालन करें भी पर्यावरण विभाग के अधिकारियों द्वारा अनुशंसा दे दिया जाता रहा है जिसका खुलासा सूचना के अधिकार में बहुत पहले हो चुका है। खनन माफियों ने अभी तक लगभग सौ एकड जमीन को रात दिन छनी छनी कर लगभग सौ फिट गहरा खनन कर चुके है; परन्तु एक मात्र अमृत पटेल के उपर कार्यवाही हो सकी है बाकी क्या शासन प्रशासन के रिश्तेदारों मे से गिने जाते होगें ? यह बता पाना संभव नहीं है। वहीं गुड़ेली के ग्रामीणों का साफ-साफ कहना है की कार्यवाही हो तो सभी खनन माफियाओं पर हो एक पर कार्यवाही और बाकी को अभय दान आखिर क्यों दिया जा रहा है ?

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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