अगर आपके शरीर का एक छोटा-सा हिस्सा अचानक जल जाए तो कितनी पीड़ा होती है। आप तुरंत उस जलन को कम करने का प्रयास करने लगते हैं। लेकिन किसी के साथ पहले कुकृत्य की घटना को अंजाम देकर उस पर केरोसिन तेल या पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी जाए तो? सोचिए, उसे कितनी पीड़ा होती होगी? देश में ऐसी घटनाएं इन दिनों आम हो गई हैं। सोंचिए बेटियां जिंदा जलाई जा रही हैं। उनमें से कई राख बन गई हैं तो कुछ न्‍याय में विलंब के कारण मौत मांग रही हैं।

देश में युवतियों, महिलाओं को जिंदा जलाने की घटनाएं बढ़ रहीं हैवानियत की हद को पार कर किसी युवती को जिंदा जला देने की घटनाएं बिहार में पिछले कई दिनों से लगातार सामने आ रही हैं, जिन्हें सुनकर रूह कांप उठती है। कहीं तो जलकर राख हो चुके शव को अपने लोग भी पहचानने से इन्कार कर दे रहे हैं तो कहीं आग से जल चुकी लड़की आईसीयू में अपनी अंतिम सांसे गिनते हुए मौत की विनती कर रही है।

मुजफ्फरपुर में दुष्कर्म का विरोध किया तो जिंदा जलाया, मुजफ्फरपुर में एक लड़की से पड़ोस के एक युवक ने घर में घुसकर दुष्कर्म की कोशिश की; और विरोध करने पर किरोसिन छिड़ककर जिंदा जला दिया। ये घटना मानवता को शर्मसार करने वाली और समाज के लिए एक बड़ा प्रश्न खड़ा करती है कि क्या लड़की होना गुनाह है ? आखिर पुलिस और समाज एक लड़की को जलता देखकर, उसकी चीखें सुनकर भी क्यों मौन रह जाता है ?

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र में एक प्रॉपर्टी डीलर के बेटे ने घर में घुसकर लड़की से दुष्कर्म की कोशिश की। इसमें नाकाम रहने पर उसने केरोसिन डालकर लड़की को जिंदा जला दिया। 90% जल चुकी लड़की को एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है, जहां इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि पीड़िता के बचने की कम ही उम्मीद है। बता दें कि ये घटना शनिवार की है, लेकिन मामला रविवार को सामने आया। पुलिस ने आरोपी प्रॉपर्टी डीलर के बेटे राजा राय को गिरफ्तार कर लिया है।

मां ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप पीड़ित की मां ने बताया कि राजा राय पिछले तीन साल से मेरी बेटी के साथ छेड़खानी कर रहा था। हम 5 बार अहियापुर थाने में शिकायत दर्ज कराने गए मगर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी। छठ के दिन भी आरोपी ने घर में घुसकर युवती से छेड़खानी की थी, लेकिन इसकी शिकायत पुलिस ने दर्ज नहीं की। आराेपी के डर से बेटी ने काेचिंग जाना भी छाेड़ दिया था। लड़का का पिता दबंग किस्म का है, इसीलिए हमारी शिकायत पर पुलिस उसके यहां जाकर लौट आती थी। पुलिस भी उस पर कार्रवाई करने के बजाय हम लोगों पर समझौता करने का दबाव बनाती थी।

लड़की की मां ने बताया कि उनकी बेटी चार बच्चों में यह सबसे छोटी थी। दो बेटियों की शादी हो चुकी है जबकि बेटा पटना में रहता है। घटना के वक्त लड़की अपने घर में अकेली थी। आग लगाने के बाद बदमाश ने ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर उसे निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया और भाग गया। रविवार को परिजनों ने उसे एसकेएमसीएच में भर्ती कराया है।

घटना के चौबीस घंटे के बाद भी अहियापुर थानाध्यक्ष विकास कुमार राय ने कहा कि – “उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। पता करते हैं। वहीं लड़की की मां और भाई मेडिकल कॉलेज में कई बार कहा कि घटना के बाद भी उन लोगों ने पुलिस को खबर की थी। उसके पहले तो कई बार इसकी शिकायत की थी।

घटना की जानकारी मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई की गई है। पीछे के मामलों को भी देखा जा रहा है। मुख्य आरोपी राजा राय को गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे की कार्रवाई जारी है।
एसएसपी मुजफ्फरपुर, जयंत कांत.

पांच साल की बच्ची के साथ हुआ था दुष्कर्म इस घटना से ठीक पहले एक ऑटोरिक्शा चालक ने पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था, जिसके बाद उस बच्ची की हालत गंभीर थी। डॉक्टरों को बच्ची का ऑपरेशन भी करना पड़ा था। बच्ची पीड़ा से कराह रही थी और हैवानियत को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गया था जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

क्सर में जिंदा जलायी गई पीड़िता की नहीं हो सकी पहचान बक्सर जिले के इटाढ़ी गांव में एक युवती की अधजली लाश खेत से बरामद हुई थी। उसे सिर में गोली मारी गई थी और फिर उसे पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जला दिया गया था। उसके साथ भी दुष्कर्म की घटना की आशंका व्यक्त की गई थी। उसके ऊपरी शरीर का हिस्सा बुरी तरह जल चुका था। सिर्फ पैर में सैंडल मोजे थे और दास्ताने मिले थे। उस अधजली लाश की पहचान तक नहीं हो सकी और फिर पुलिस ने उस शव का अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन वो भी तो किसी की बेटी रही होगी, बहन रही होगी। शव को देखकर नवविवाहिता होने की बात पता चली है तो कोई तो उसका पति रहा होगा। उसका परिवार रहा होगा। लेकिन कोई सामने नहीं आया और खामोशी से एक महिला दफ्न कर दी गई।
मस्तीपुर की जिंदा जलायी गई पीड़िता को नहीं पहचान सका कोई ऐसी ही घटना उसके बाद जिले में भी घटी, वहां भी वारिसनगर के खेत से युवती की अधजली लाश बरामद हुई। उसे भी अपराधियाें ने मुंह में कपड़ा ठूंस कर पेट्राेल डाल जिंदा जला दिया था। हत्या से पूर्व उससे दुष्कर्म की आशंका भी व्यक्त की जा रही थी। घटनास्थल से पुलिस ने एक झुमका बरामद किया था। मृतक के दोनों हाथों में नई लहठी थी और उसका पैर रंगा हुआ था। इससे अनुमान लगाया गया था कि युवती नवविवाहिता है। लेकिन, उसकी भी पहचान नहीं हाे पायी और उस लाश ने खामोशी से अपना नाम-परिचय किसी को नहीं दिया औऱ दफ्न हो गई।

एक स्त्री के पैरों के बीच से जन्म लेने के बाद उसके वक्षस्थल से निकले दूध से अपनी भूख, प्यास मिटाने वाला इंसान बड़ा होते ही औरत से इन्हीं दो अंगो की चाहत रखता है, और अगर असफल होता है तो इसी चाहत में वीभत्स तरीको को अंजाम देता है. बलात्कार और फिर हत्या। जननी वर्ग के साथ इस तरह की मानसिकता क्यूँ? मेरी नजरों में बलात्कार से बड़ा कोई जुर्म नहीं है धरती पर।

 भगवान भी अपराध रोकने की गारंटी नहीं दे सकते : डीजीपी।

बिहार में रेप और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर पूछे गए एक सवाल पर राज्‍य के डीजीपी गुप्‍तेश्‍वर पांडे भड़क गए। उन्‍होंने कहा कि भगवान भी यह गारंटी नहीं दे सकते हैं कि समाज में अब अपराध नहीं होगा। अपराध चूहे और बिल्‍ली के खेल की तरह से है। डीजीपी ने कहा कि 16 साल के बच्‍चे नशा कर रहे हैं और अपराध कर रहे हैं। अपराध को रोकने के लिए समाज को आगे आना होगा, यह केवल पुलिस का काम नहीं है। डीजीपी का यह बयान अब सोशल मीडिया में वायरल हो गया है।

अपराध रोकना केवल पुलिस काम नहीं है। पुलिस उसके लिए विशेष एजेंसी जरूर है। लेकिन जब तक जनता नहीं जागेगी और अपराधियों के खिलाफ एक माहौल नहीं बनेगा तब तक यह नहीं रुकेगा। अपराध की संस्‍कृति के खिलाफ सारे लोगों को जगना होगा तभी समाज से अपराध पूरी तरह से खत्‍म होगा।

डीजीपी गुप्‍तेश्‍वर पांडे।

साभार : सुनहरेदर्पणडॉटकॉम

 

 

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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