शासकीय कार्य में बाधा, शहर कोतवाली में जुर्म दर्ज।
हेडकांस्टेबल से की मारपीट, गाली गलौच !

तमाम तरह की अपराधों के लिए गर लायसेंस की जरुरत हो तो बड़े नेताओं के साथ या फिर “सेल्फ़ीवाले कका” के साथ अपनी फोटो खिंचवाकर उसे फेसबुक में अपलोड कर लीजिए; आपका कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता, भले ही वह पुलिस का छोटा अथवा आलाधिकारी क्यों न हो प्रदेश में अब तक यही तो होते आया है। चाहे भाजपाई हो या कांग्रेसी, नेताओं की तो बात ही छोड़िए साहब, यहाँ तो टुच्चे और छुटभैये भी बड़े-बड़ों के बारह बजाते फिर रहे हैं। अभी कल की ही एक घटना है, बालोद के सर्किट हॉउस में एक पूर्व विधायक भैयालाल सिन्हा का भाई रंगरेलिया मानते हुए धरा गया ! मामले ने तूल पकड़ा तो भैयालाल ने अपने भाई से ही रिश्ता तोड़ दिया जबकि सूत्र बताते हैं कि उन्हीं के कहने पर उसके रंगीन मिजाज भाई को सर्किट हॉउस में कमरा दिया गया था…., अब ऐसा ही मगर कुछ अलग तरह का मामला राजनाँदगाँव से आया है। एक कांग्रेसी कार्यकर्त्ता ने सीधे पुलिस कंट्रोल रूम में घुसकर एक कांस्टेबल को पीट दिया…!

*राजनांदगांव। पुलिस की पिटाई के मामले में देश की राजधानी दिल्ली अभी गरम है और इसी गर्माहट के बीच सोमवार की रात राजनांदगांव के पुलिस कंट्रोल रूम में एक हेडकांस्टेबल पीट गया। हेडकांस्टेबल को पीटने वाला कोई और नहीं बल्कि 12 माह पहले परिवर्तन लहर के चलते छत्तीसगढ़ की सत्ता में आए राजनांदगांव निवासी कांग्रेसी कार्यकर्त्ता निखिल द्विवेदी है।

निखिल ने पुलिस कंट्रोल रूम में क्या कुछ किया इसकी पूरी शिकायत हेडकांस्टेबल मिलन साहू 186 द्वारा दर्ज कराए जाने के बाद निखिल द्विवेदी के खिलाफ मंगलवार की सुबह छह बजे अपराध क्रमांक 0653/19,धारा 186, 294-आईपीसी, 353-आईपीसी के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
पुलिस के ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज एफआईआर को सेंसिटिव बताकर दर्शाया गया है !

बताया जाता है कि; रात करीब एक बजे निखिल द्विवेदी के द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर ड्यूटी में तैनात हेडकांस्टेबल मिलन साहू को यह बताया गया कि होटल राजइंपीरियल के भीतर अप्रिय घटना हो रही है। सूचना के आधार पर कंट्रोल रूम ड्यूटी पर तैनात हेडकांस्टेबल के द्वारा वायरलेस से पाईट चलाकर लालबाग पुलिस और पेट्रोलिंग पार्टी को घटना स्थल के लिए रवाना होने कहा गया। मौके पर पुलिस पार्टी के पहुंचने पर किसी भी प्रकार की घटना की कोई जानकारी पुष्टि नहीं हुई।

कुछ देर बाद निखिल द्विवेदी का पुलिस कंट्रोल रूम में फिर फोन आया और फोन पर ही गंदी-गंदी गाली-गलौच करने लगा। थोड़ी देर बाद निखिल द्विवेदी स्वंय पुलिस कंट्रोल रूम पहुंच गया और फोन कौन उठाया था कहकर गाली-गलौच करने लगा। जानकारी के अनुसार इस दौरान निखिल ने हेड कांस्टेबल मिलन साहू से मारपीट भी की, जिसका स्टाप में मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों ने बीच-बचाव किया। बताया जाता है कि घटना के दौरान कंट्रोल में दिनेश पटेल, सैनिक किशन साहू, दुलार सेन, विरेंद्र मंडावी, थानसिंह मौजूद थे।

पुलिस जवान पीट गया और टीआई ने कहा जानकारी नहीं है पुछकर बताता हूं ?

राजनांदगांव शहर के भीतर पुलिस कंट्रोल रूप में कांग्रेस नेता ने दादागिरी कर दी, गुंडागर्दी हो गई….हेडकांस्टेबल मार खा गया और शहर कोतवाली के टीआई वीरेंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि उन्हे मालूम नहीं है…! थाने में पुछकर बताता हूं ? घटना का सच न बताने के पीछे टीआई श्री चतुर्वेदी की मंशा चाहे जो भी हो पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे में पुलिस के छोटे कर्मियों का मारल कैसे डाऊन नहीं होगा ? जबकि यह संभव ही नही है कि टीआई वीरेंद्र चतुर्वेदी को घटना के बारे में मालूम न हो…! जब टीआई को दुबारा फोन लगाया गया तो उन्होने कहा कि वे मंत्री जी आए है उनके साथ है। थाने पहुंचकर बताता हूं पर दुबारा उनका फोन नहीं आया। पुलिस के ऐसे अधिकारियों को तो वर्दी छोड़ प्राध्यापक बन जाना चाहिए जो अपने मातहत और अपने विभाग के साथ हुए ज्यादती के सच को बताने में संकोच करे।

*पूरन साहू।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.