* मेरे शहर में *

जीवन चलता रहता है
मेरे शहर में,
ना कुछ रुकता, ना अटकता है
मेरे शहर में ।

मेरे शहर में …
चंद नेता, कुछ पत्रकार
कोई नौकरीपेशा, कोई बिना सरोकार
जिंदा रहता है
मेरे शहर में ।

मेरे शहर में …
समाज सेवक, कुछ व्यापारी, धोखा धूर्त्तता मक्कारी,
कोई नौटंकी दिखाता है
मेरे शहर में।

मेरे शहर में ….
ईद और दिवाली,
जलसे, जुलूस, कव्वाली,
रावण भी मरता है
मेरे शहर में।

मेरे शहर में …
आरती, अजान, कीर्तन,
सबद, कथा और भजन,
कबीर कहाँ रहता है
मेरे शहर में।
जीवन चलता रहता है …

मेरे शहर में…
पुलिस, चोर और अधिकारी,
राजा, मंत्री, कुछ दरबारी
कुछ ना कुछ घटता रहता है
मेरे शहर में।
ना कुछ रुकता, ना अटकता है ..

किरीट ठक्कर गरियाबंद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *