प्राचार्या का कहना मेरे “अधिकारी को खुश” करो नही तो काम भूल जाओ…

दुर्ग (hct)। राजधानी से महज 27 किमी दूर जुड़वाँ शहर (twin city) के नाम से मशहूर और देश-दुनिया में अपनी ख्याति के लिए प्रसिद्द भिलाई; जिसे हम “एजुकेशन हब” के नाम से भी जानते हैं, से एक खबर दबे पांव बड़ी तेजी से सोशल मीडिया में अपनी बदनामी का राग अलाप रहा था। स्टील सिटी भिलाई स्थित मरोदा टैंक के शा० उ० मा० वि० से उजागर हुए इस खबर से समूचे शिक्षा जगत को बदनामी के कगार ला पटका है।
वाक्या का सार यह कि, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मरोदा टैंक, जिला दुर्ग की है जहां प्राचार्या मित्राराय चौधरी के द्वारा अनुकंपा में नियुक्त महिला के साथ बत्तमीजी किया गया। जब वह अपने काम मे पहले दिन पहुंची तो पहले ही दिन उसे स्कूल के 5 कमरों की सफाई झाड़ू-पोछा करवाया गया, उक्त महिला बेवा है उसका पति शिक्षा विभाग मे क्लर्क (बाबू) के पद पर कार्यरत थे। तबीयत खराब होने से उनकी मृत्यु हो गई जिनके जगह पर उनकी धर्मपत्नी को नौकरी मिली है। वह भी शिक्षा विभाग के दसों चक्कर लगाने के बाद चपरासी का पद दिया गया। जहां प्राचार्य द्वारा अशोभनीय व अश्लील बाते सुनाई व बोली गई जो किसी भी महिला को गंवारा नहीं था।
जब वह पहले दिन स्कूल गयी तो वहाँ के प्राचार्या के द्वारा उससे झाड़ू-पोछा करवाया गया, साथ ही यह भी कहा गया शिक्षा विभाग में पदस्थ लेखपाल सत्येन्द्र सिंह राजपूत से बात हुआ है, अभी तुमको नियुक्ति देने से मना किया गया है। तुम पहले लेखपाल राजपूत जी को खुश करो, वह जैसा कहे; जहां पर तुमको बुलाये वहाँ जाकर उनको खुश करो, तभी तुमको काम करने दिया जाएगा। इसके अलावा महिला के निजी मामले तथा जाति को लेकर प्राचार्य व राजपूत दोनों के द्वारा महिला की जाति को लेकर कहना के मैं बंगाली हूँ; प्राचार्या हूँ, मुझे राज्यपाल से पदक प्राप्त हुआ है। तुम तो गड़िया हो जात की तेली हो (साहू) तुम जैसे लोगो के कारण ही छत्तीसगढ़ आगे बढ़ नही पा रहा है। छत्तीसगढ़ को चलाने वाले हम जैसे बंगाली, राजपूत है। हम अधिकारी है; कुछ भी कर सकते है। आदि-अनादि….बहुत अधिक अशोभनीय/अश्लील बातें कही जाने की पुष्टि हुई है। महिला के विधवा होने के बाद इन जैसे अधिकारी लोगो के कारण ही समाज में महिलाओं का शोषण को बढ़ावा मिलता है, महिलाएं प्रताड़ित होती है।
पीड़ित महिला द्वारा दिया गया शिकायती पत्र
एक सम्मानजनक पद पर आसित किसी ओहदेदार को किसी महिला के साथ ऐसा अभद्र व्यवहार भला कोई कैसे कर सकता है ? एक महिला अगर विधवा हुई भी है तो उसमे महिला की गलती क्या है महिला के दो छोटे बच्चे भी है जो बहुत ही छोटे है जिनकी भविष्य की जिम्मेदारी भी उक्त महिला के ऊपर है। जब पिता का साया किसी बच्चो के सर से उठ जाए तो माँ ही उन दोनों का लालन पालन करेगी। महिला पढ़ी-लिखी है। चाहे तो उसे शिक्षा अधिकारी उसके पति का जो पद था वह दे सकते थे, क्योंकि वह पद खाली था और है भी।
पीड़िता के द्वारा जानकारी दी गई कि नौकरी के एवज में उससे 5000 रुपए राजपूत द्वारा लिया गया और क्लर्क के पद हेतु 5 लाख की माँग की गई थी। पीड़ित महिला से यह भी कहा गया था कि, पद है भी तो वीआईपी लोगो के लिए है, तुमको चपरासी का पद देंगे लेना हो तो पद नही तो मत लो। ऐसा कहकर उस महिला को वहाँ से भगा दिया गया। महिला को बच्चो का पालन-पोषण करना है, इसलिए उसने चपरासी पद के लिए हामी भर दी व शास.उच्च. मा.विद्या. मरोदा टैंक भिलाई मे चपरासी का काम करने का सोचा।
बात जब मीडिया तक पहुंची तो आनन-फानन में इस मामले को विभाग के कुछ अधिकारी दबाने पर लगे हुए थे, लेकिन मीडिया तो मीडिया है जनाब; लाख प्रयास और रसूखदारों के शामिल होने के बाद भी आख़िरकार मामले ने तूल पकड़ा और अब जाकर उक्त मामले में एक जाँच समिति गठित कर उक्त मामले में मंगलवार तक रिपोर्ट मांगी गई है।

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By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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