विनोद नेताम
(संवाददाता)
बालोद। अधिकारी मस्त, जनता त्रस्त कुछ ऐसा ही हाल जिला मुख्यालय की नगर पालिका का है। ताजा मामला मृत्यु पंजीयन के बाद भी समय सीमा में मृत्यु प्रमाण पत्र प्रदान नही किए जाने का है।
जिला योजना समिति के सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने बताया कि, बालोद नगर पालिका में पंजीकृत मृत्यु घटनाओं का प्रमाण पत्र समय सीमा में संबंधितों को प्रदान नही किया जा रहा है। जन्म एवं मृत्यु पंजीयन योजनांतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक पश्चात संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का भी पालन नही किया जा रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके है कि, पंजीयन और निर्धारित समय सीमा के बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नगर पालिका कार्यालय में अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सदस्य और पार्षद ने बताया कि, अगस्त महीनें के दूसरे सप्ताह में एक मृत्यु घटना की सूचना निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से दी गई थी।
सूचना के 23 दिनों बाद जब मृत्यु प्रमाण लेने परिजन पहुंचे तो पता चला कि ऑनलाइन दर्ज ही नही किया गया है। अब दर्ज करने में तकनीकी दिक्कतें, सीएमओं का ट्रांसफर और नए सीएमओं की ज्वाइनिंग का हवाला दिया जा रहा है।

नागरिक सेवाओं की सुविधा को झुठलाने में लगी है नगर पालिका !

नगर पालिका में नगरीय निकायों के अंतर्गत आने वाले नागरिक सेवाएं संबंधी सुविधाएं उपलब्ध की गई है किंतु नगर पालिका के बेलगाम अधिकारी नागरिक सेवाओं की सुविधा को झुठलाने में लगे है। शहर की जनता को जन्म और मृत्यु पंजीकरण एवं प्रमाणपत्र के लिए नगर पालिका के चक्कर भी काटने पड़ रहे है और निराश होकर लौटना भी पड़ रहा है।

सेवा प्रदान करने के लिए निर्धारित है समय सीमा

छत्तीसगढ़ शासन योजना, आर्थिक एवं सांख्यकीय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के हिसाब से नगर पालिका परिषद में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र तथा प्रतिलिपि जारी करने के लिए 15 दिवस की समय सीमा निर्धारित की गई है।

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी तारीख पे तारीख

नगर पालिका में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी मृतकों के परिजनों को तारीख पे तारीख दी जा रही है। जन्म मृत्यु के अलावा और भी नागरिक सेवाओं के लिए नगर पालिका में रटा रटाया जवाब मिल रहा है, सीएमओं का ट्रांसफर हो गया है नए आएंगे तब होगा।

प्रभारी सीएमओं बस नाम के, डिजिटल हस्ताक्षर के लिए 13 सौ नही है मेरे पास

पुराने सीएमओं तबादले के बाद रिलीव भी हो गए, जाते जाते कार्यपालन अभियंता सलीम सिद्दिकी को प्रभार देकर गए है लेकिन कोई काम के नही। मृत्यु प्रमाण पत्र में डिजिटल हस्ताक्षर के संबंध में प्रभारी सीएमओं का कहना है कि डिजिटल हस्ताक्षर के लिए 13 सौ लगेंगे पैसे नही है मेरे पास और मैं अपनी जेब से क्यों दूंगा।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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