ChhattisgarhCorruption

लूट रहे “बालोद नपा के लाला, देकर दीगर राज्य का हवाला”

*हेमंत साहू
बालोद। मकान नामांतरण समझौता शुल्क के नाम पर नगर पालिका बालोद में लिए जा रहे भारी भरकम शुल्क को लेकर जिला योजना समिति के सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने एस के दुबे संयुक्‍त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय नगरीय प्रशासन एवं विकास दुर्ग से सर्किट हाउस बालोद में मुलाकात की। मुलाकात के दौरान संयुक्त संचालक को नगरीय निकाय क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में की जा रही गड़बड़ियों से भी अवगत कराया। विस्तारपूर्वक चर्चा पश्चात संयुक्त संचालक ने नगर पालिका से प्रतिवेदन मंगाकर आवश्यक जांच कर कार्यवाही की बात कही है।
गृहकर पंजी में नाम चढ़ाने करते है नामांतरण
सदस्य और पार्षद ने बताया कि, आम जनता गृहकर पंजी या अन्य दस्तावेजों में नाम चढ़ाने के लिए नगर पालिका कार्यालय आते है तो उन्हें नामांतरण के लिए कहा जाता है। निर्धारित प्रारूप में आवेदन, इश्तहार प्रकाशन आदि की प्रक्रिया का हवाला दिया जाता है।
नगर पंचायत के नाम पर लेते है आवेदन
नगर पालिका बालोद में नामांतरण के लिए मुख्य नगर पालिका पदाधिकारी नगर पंचायत बालोद के नाम आवेदन लिया जाता है। उक्त आवेदन प्रारूप को नगर पालिका स्वयं आवेदक को उपलब्ध कराती है।
मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम का हवालानगर पालिका द्वारा उपलब्ध कराए गए आवेदन प्रारूप में मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा का हवाला दिया गया है। 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हो चुका है। राज्य निर्माण पश्चात छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम भी प्रचलन में है बावजूद उसके मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम का उल्लेख समझ से परे है।
मकान नामांतरण समझौता शुल्क के नाम से लेते है भारी भरकम शुल्क
नामांतरण के लिए नामांतरण समझौता शुल्क के नाम पर 2 हजार 5 सौ से लेकर 5 हजार रुपए तक अनाप शनाप राशि ली जा रही है। 1 हजार 5 सौ रुपए इश्तहार प्रकाशन के लिए अलग से लिया जाता है।
रसीद में भू-स्वामित्त या अन्य अधिकार प्रदान नही करने का टीप
मकान नामांतरण समझौता शुल्क के नाम पर नगर पालिका द्वारा भारी भरकम शुल्क लिया जाता है और प्रक्रिया भी पूरी की जाती है। लेकिन शुल्क की रसीद में यह टीप अंकित होता है कि, यह रसीद किसी भी प्रकार का भू-स्वामित्त या अन्य अधिकार प्रदान नही करता है। जब कोई अधिकार प्रदान नही तो भारी भरकम शुल्क और प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button