नौकरशाही के आतंक कब तक ?

प्रदेश में अभी ठेठ छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री का शासन है और हमारे मुखिया ने हरेली तिहार में गेड़ी चढ़कर यह जता दिया है कि प्रदेश में सड़कों का क्या हाल है इसलिए जहाँ न पहुंचे गाडी वहीं से गुजरे गेड़ी। अत:एव पीडब्ल्यूडी विभाग के इस सब इंजीनियर बी.डी.शर्मा साहब के द्वारा निर्मित सड़क का हाल जानकर दाउ जी यानि की मुख्यमंत्री ने अब छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया खेल को भी बढ़ावा देने का विचार कर यह साबित कर दिया है और छूट दे दिया है कि अगर सड़कें मजबूती से बनी तो पांच साल तक क्या “गोबर दे बछरू खेलेंगे ?”
विनोद नेताम
(संवाददाता)
बालोद। राज्य के महिला बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया के कार्यक्रम के व्यवस्था मे पूरा अमला लगा रहा, क्या बड़े क्या छोटे सब के मनो में भय किसी अव्यवस्था के कारण मंत्री नाराज ना हो जाए। सभी पूरे एक्टिव होकर मोर्चा संभालने की कोशिश मे लगे रहे, लेकिन गुरूर विश्राम गृह के कर्मचारी मंत्री महोदया के जलपान के व्यवस्था से गायब थे जिसे देखकर हमे आश्चर्य हुआ और “हाईवे क्राइम टाइम, बालोद” के कैमरे कर्मचारीयो को ढूंढने लगी तो विश्राम गृह के सारे कर्मचारी एक स्वीप्ट कार को मल-मल कर धो रहे थे।
हमे उस वक्त ऐसा लगा कि मंत्री जी शायद अपने काफिला मे इस गाड़ी को शामिल करने वाली है। गाड़ी धोने वाले जनता के छोटे-छोटे सेवको से पूछा गया कि कर्मयोगी कर्मचारी साथियो यह वाहन किसके शान मे बड़ी तीव्रता और विनम्रता से सजाया जा रहा है।
कर्मचारियों ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग के सब इंजीनियर बी.डी. शर्मा साहब के शान को सुशोभित यह वाहन है। हमने विश्राम गृह के एक कोने मे विराजमान शर्मा जी के मुखारबिंदु से इस अनमोल गाड़ी धुलाई की लीला उनकी मुख से सुनकर अपने कलम को जगाते पूछा “महोदय जी, इस लीला का आधार क्या है ? शर्मा जी ने बताया :- “गुरूर के विश्राम गृह मे गाड़ी धुलवाने मे जो आनंद है वो और कही नही। यहाँ के कर्मचारी मेरे गाड़ी की सेवा मे तन-मन से समर्पित रहते है। गुरूर विश्राम गृह के मनमोहक वादियो के बीच अपनी गाड़ी को धुलते देख मन विभोर उठता है। लेकिन यहाँ के पत्रकार अक्सर इस बात का विशेष विरोध करने पहुंच जाते है।
घटिया सड़क निर्माण कर अपने मुंह को दूसरे के खाये पान से रचने वाले बी.डी. शर्मा जो गुरूर से सनौद मार्ग तीन महीने मे कमीशन खोरी पर जबान खोलते हुये फट गई बी.डी. शर्मा के अनुसार हैवी ट्रैफिक लगती है। दिन मे आठ दस गाड़ी चले तो हैवी ट्रैफिक लगती सर से पूछा गया आप कितने बार देखे हों ? जवाब नही। तीन करोड़ खर्च कर बनाया गया इस सड़क मे साहब के अनुसार हाईवा चलाता है। क्या हाइवा वाहन मालिक रोड टेक्स नही देता है। हमारे द्वारा साहब के लीला को अद्भुत करार देते हुए फिर पूछा गया, साहब आप और आपके विभाग ऐसे सड़क क्यों नही बनाता जिसमे चोर भी चल सके और उनका पीछा करते हुए पुलिस भी, नेता भी चले और अधिकारी मंत्री भी चले और संत्री। इन कठोर और निर्दय सवाल से हलकान आदरणीय बी.डी. शर्मा साहब अपने चमचमाते वाहन से लुप्त हो गये।
बालोद से “हाईवे क्राइम टाइम” के लिए विनोद नेताम

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