*हेमंत साहू
बालोद। प्रकृति के गोद मे घने जंगलों के बीच बसे ग्राम पंचायत बेलोदा के सरपंच जगनू मंडावी के मनमानी के चलते ग्राम के आम जनता परेशान। जनता ने जिनके ऊपर भरोसा करके जिन्हें जनप्रतिनिधि बनाया, उसी जन प्रतिनिधि के मनमानी के चलते अब जनता परेशान हो गई है, ग्राम पंचायत बेलोदा के आश्रित ग्राम गोतुलमुडा में आम जनता को सरकार की किसी भी योजना का लाभ नही पहुचाया जाता। जब ग्रामीणों द्वारा सरपंच को फोन किया जाता है तो सरपंच फोन भी नही उठाता, ना ही कभी आश्रित गांव में जाना मुनासिब समझता है, यहाँ ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि सरपंच कभी गांव में नही आता ।
ग्रामीणों द्वारा यह भी बताया गया, गांव का चौक जो कि कीचड़ से भरा है, यहाँ इतनी बदबू आती है कि, स्वांस ले पाना मुश्किल है, जिसके चलते कीचड़ कई बीमारियों को आमंत्रित कर रही है, कई बार इस कीचड़ के कारण ग्रामीण दुर्घटना के शिकार हो चुके है, यहाँ से कई बच्चे आते जाते है जो कई बार कीचड़ के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो चुके है, कीचड़ के कारण बच्चो को स्कूल जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, कई बार बच्चो के स्कूल गणवेश गंदा हो जाता है, जिसके कारण बच्चे स्कूल नही जाते, कई बार सरपंच को इस बारे में शिकायत किया जा चुका है, किन्तु सरपंच कान में तेल डाल कर सो गया है, सरपंच के कान में जू भी नही रेंगती ।
जहाँ एक तरफ राशनकार्ड का नवीनीकरण जोरो पर चल रहा है, वही सरपंच जगनू मंडावी ग्राम के गरीब शंकरलाल को राशनकार्ड के लिए घुमा रहा है।
शंकरलाल ने बताया उसने कई बार सरपंच जगनू मंडावी को राशनकार्ड के लिए कहा, शंकरलाल ने कहा मैं गरीब, कम पढ़ा लिखा हु, मुझे साहब लोगों से बात करने नही आता, साथ में कलेक्टर आफिस चलो, लेकिन सरपंच ग्रामीण की एक बात नही मानता, यहां तक कि किसी ग्रामीण के काम के लिए ग्रामीण से ही पैसा मांगता है ।
ग्रामीणों ने रोजगार गारंटी में काम किया है, करीब 9-10 महीने होने को आ गया है, आज तक ग्रामीणों को रोजगार गारंटी का पैसा भी नही मिला है, ग्रामीणों ने बताया कि अब किसानी का काम शुरू हो गया है, किसानी के लिये बहुत पैसा लगता है ऐसे में सरपंच या शाशन द्वारा जब पैसा रोका जाता है तो उनकी आर्थिक स्तिथि पर धक्का पड़ता है ।
“शासन के शौचालय योजना में भी जमकर हुआ बंदरबाट”
सरपंच द्वारा हितग्राही को किसी को 100-200 ईंट दिया गया, ग्रामीण अपने घर का शौचालय खुद बनाये, आज तक ना ही उन्हें मजदूरी भुगतान मिला ना ही प्रशासन द्वारा दिया जाने वाला लाभ।
वृद्धा पेंशन भी नही मिला ग्रामीणों को 
ग्रामीण द्वारा ये बताया गया जो ग्रामीण बहुत ज्यादा वृद्ध हो गए है, उन्हें पेंशन दिया जाता है, लेकिन कुछ महीनों से वृद्धा पेंशन भी नही मिला है हितग्राहियों को।
जब सरपंच से ग्रामीणों के समस्या को लेकर फोन में बात करने का कोशिस किया गया तो सरपंच ने स्पष्ट कहाँ कोई मेरा कुछ नही कर सकता, जिसको जो करना है करे, सरपंच के इस तरह से बात करने से इतना तो समझ आता है, सरपंच खुले आम प्रशासन के नाक के नीचे ऐसा खेल रहा है व प्रशासन के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सरपंच जगनू मंडावी के ऊपर अंधा भरोसा करते है और जिस तरीके से जगनू मंडावी ने बात किया गया उनके बातो से ऐसा लगता है। जगनू मंडावी जिला प्रशासन को जी भरकर चढ़ोत्तरी चढ़ा चुका है, जिसके कारण जगनू मंडावी ऐसा काम कर रहा है, जगनू मंडावी अपने आपको इतना बड़ा बना लिया है कि उसे प्रशासन का कोई डर नही है।
आपके द्वारा मुझे जानकारी दिया गया, मैं जांच कमेटी बिठाता हूँ, यदि सरपंच और सचिव दोषी पाए गए तो मैं कार्यवाही करूँगा।
बी.एस. राज, सी.ई.ओ.
जनपद पंचायत डौन्डी
जनता से जुड़े बात और जनता के अधिकारों को लेकर जब हमारे द्वारा विधायक व महिला बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया को कई बार फोन किया गया तो मैडम जी द्वारा आम जनता के परेशानी को समझना तो दूर फोन उठाना भी मुनासिब नही समझे। चुनाव के समय तो कई बार घर-घर घूमते नेता, चुनाव जीतने के बाद हम आपके है कौन वाली बात चरितार्थ सामने आ रही है।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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