उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की चेयरपर्सन दरवेश यादव की आगरा कोर्ट परिसर में हत्या के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है। याचिका में उनकी हत्या की जांच सीबीआई से कराने और उनके परिजनों को 25 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आग्रह भी किया गया है।

25 जून को मामले में होगी सुनवाई

शुक्रवार को जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस सूर्य कांत की अवकाश पीठ के समक्ष इस मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया तो पीठ 25 जून को इस पर सुनवाई के लिए सहमत हुई। महिला वकील इंदू कौल की इस याचिका में यह कहा गया है कि आगरा कोर्ट परिसर में हुई इस हत्या की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए और राज्य की पुलिस को जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए जाने चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि महिला वकीलों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जबकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सभी महिला वकीलों की सामाजिक सुरक्षा योजना बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए जाएं। याचिका में दरवेश के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने के लिए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को निर्देश देने का आग्रह भी किया गया है। इससे पहले 13 जून को मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया था कि वो राज्य के सभी कोर्ट परिसरों में फुलप्रूफ सुरक्षा सुनिश्चित करे।

क्या था यह पूरा मामला ?

यूपी बार काउंसिल की पहली महिला चेयरपर्सन 38 वर्षीय दरवेश यादव की आगरा जिला अदालत परिसर के अंदर उनके सहयोगी मनीष शर्मा ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। “मुख्य न्यायाधीश (जस्टिस गोविंद माथुर) ने उक्त घटना को गंभीरता से लिया है,” एक बयान में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने कहा। मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी बिरादरी को यह भी आश्वासन दिया है कि उच्च न्यायालय, राज्य के सभी न्यायालय परिसरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। उक्त बयान में यादव की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। रजिस्ट्रार जनरल ने कहा, “राज्य सरकार को उच्च न्यायालय, इलाहाबाद व लखनऊ और राज्य की जिला अदालतों में सुरक्षा के संबंध में तुरंत उचित कदम उठाने के लिए निर्देशित किया गया है।”

साभार : *livelaw.in

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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