रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता द्वारा डीके में की गई अनियमितता और घोटालों को लेकर शीघ्र हो सकती बड़ी कार्यवाही…

गुप्ता ने डीके में फर्जी नियुक्ति,आउट सोर्सिंग,मेडिकल जांच व अन्य व्यवस्था को बेचने का काम ही नही किया फर्जी डॉक्टर भी बनाया…!

गुप्ता के साथ विदेश यात्रा पर जाने वाली डीके की ऑपरेटर कम डॉक्टर के खिलाफ आज या कल हो सकती फर्जीवाड़ा की रिपोर्ट।

रायपुर (hct)। विगत 15 साल तक छत्तीसगढ़ में भाजपा ने रमन सिंह जे नेतृत्व में शासन किया इन 15 सालों में रमन सिंह ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे। इन्हीं दिनों उन्होंने कुछ दंश भी झेले। एक प्रदेश के मुखिया होने के नाते उनका परिवार भी इस दंश के शिकार हुए, उनकी बेटी को अपने से उम्रदराज युवा से मोहब्बत हो गई और वह अपना घर छोड़कर भाग गई थी। मगर; इज्जत सभी को प्यारा होता है सो डॉ साहब अपनी बेटी का विवाह उसी उम्रदराज व्यक्ति से करने को विवश हो गए।

अब कहानी की शुरुआत होती है यहीं से…
शादी होती है तो दान-दहेज भी दिया जाता है और हमारे मुखिया ने अपने दामाद बाबू को डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को बतौर दहेज दे दिया !
प्रदेश के मुखिया डॉ रमन सिंह और डीकेएस के मुखिया डॉ. पुनीत गुप्ता, मनमानी तो होनी ही है साहेब, सो पुनीत गुप्ता के डीकेएस में पदस्थ कार्यकाल में अनेक घपले-घोटाले हुए, अनेक अनियमितताएं बरती गई। आउट सोर्सिंग, फर्जी नियुक्तियां मेडिकल मशीनरीज की खरीद-फरोख्त में हेराफेरी आदि-अनादि के अलावा एक चौकाने वाले रहस्य का भी पर्दाफाश हो चुका है..?
पुनीत गुप्ता ने न सिर्फ अपने कार्यकाल में अनेक घपले-घोटाले किए, बल्कि एक महिला कम्प्यूटर ऑपरेटर को डॉ की मानद डिग्री भी दिलवा दी ! सुनने में आया है कि इस कम्प्यूटर ऑपरेटर से पुनीत के किसी जन्म के पुण्यकर्म जुड़ गए थे।
अज्ञात सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी पुनीत गुप्ता ने अपनी एक प्रेयसी ? कम्प्यूटर ऑपरेटर को बगैर मानक योग्यता के फर्जी डॉ. तक बना डाला ! और उसे अपने साथ विदेश यात्रा भी करवाया ऐसा खबर सूत्रों के हवाले से छनकर आने लगी है।
खबर मिली है कि पुनीत के इस पुनीत कार्य की सहभागिनी के खिलाफ आज या कल में फर्जीवाड़े से संबंधित रिपोर्ट हो सकती है।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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