तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर गुजरात की अनुभवहीन कंपनी मेसर्स एफसीएचटी को फूड एंड इंटरटेनमेंट के खिलाफ छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों की अस्मिता बचाने सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला और पत्रकार कमल शुक्ला का हस्ताक्षर अभियान।

जावेद अख्तर
रायपुर। नगर निगम के उस फैसले का विरोध बढ़ता जा रहा है जिसमें रायपुर शहरवासियों की धरोहर तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर गुजरात की मात्र 2 वर्ष पुरानी अनुभवहीन कंपनी मेसर्स एफसीएचटी को फूड एंड इंटरटेनमेंट के लिए 37 लाख सालाना पर दिया जा रहा है।
बिना पार्किंग की जगह होते हुए इस स्थान को दिया जाना तर्कहीन तो है ही साथ ही साथ बेरोजगार छत्तीसगढ़ी युवक युवतियों के साथ मजाक भी है। अगर काम देना ही है तो इस गुजराती कंपनी को काम देने के बजाय लगभग 100 छोटी दुकानें बनाकर स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। उक्त मांग रायपुर के सक्रिय आरटीआई एक्टविस्ट कुणाल शुक्ला ने उठाई है।

आज शाम मरीन ड्राइव पर धरना व हस्ताक्षर अभियानकुणाल शुक्ला ने इस फैसले का विरोध करते हुए दिनांक 6 मार्च को शाम 5 बजे वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला के साथ तेलीबांधा मरीन ड्राइव (रायपुर) में उपस्थित होकर हस्ताक्षर अभियान चलाने जा रहें हैं।

कुणाल शुक्ला का कहना है कि इस महत्वपूर्ण जगह को गुजराती कंपनी को सरकार द्वारा 37 लाख में दिया जाना छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का मज़ाक उड़ाना है। जो कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने रायपुर समेत प्रदेश भर के लोगों से अपील की है कि छत्तीसगढ़िया संस्कृति और धरोहर को बचाने के लिए विरोध स्वरूप काली पट्टी लगा कर काम करें।
उन्होंने हाइवे क्राइम टाईम से बात करते हुए कहा कि कल शाम पांच बजे मरीन ड्राइव पर’ मोर रायपुर के सामने, अगर आप मुर्दा नहीं हैं तथा छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों की अस्मिता बचाना चाहते हैं तो अपना हस्ताक्षर करने जरूर आएं।

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