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Chhattisgarh

सामाजिक समरसता और सद्भाव विषय को लेकर हुई मंथन।

0आजादी के बाद समाज में सामाजिक समरसता आयी और अभी भी बदलाव की है जरूरत : रामदास अग्रवाल
0 आज भी समाज में भेद भाव व्याप्त है : लक्ष्मी लहरे
0 सामाजिक समरसता और सद्भाव पर व्याख्यान और साहित्यिक संगोष्ठी का हुआ आयोजन।

कोसीर (रायगढ़)। छत्तीसगढ़ साहित्य परिवार, जिला इकाई रायगढ़ के तत्वाधान व आनन्द सिंघनपुरी के संयोजन में सतनाम भवन मौहारभाठा सारंगढ़ में सामाजिक समरसता और सद्भाव के विषय को लेकर एक दिवसीय व्याख्यान माला एवं साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें सामाजिक समरसता और सद्भाव पर विभिन्न साहित्य मनीषियों द्वारा वृहत चर्चा की गई, जिसमें रायगढ़ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. के. के. तिवारी द्वारा विषय प्रवेश किया गया।
उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय मंत्री तथा रामदास द्रौपदी फाॅउन्डेशन के संरक्षक रामदास अग्रवाल रहे। वहीं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. के. के. तिवारी रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि संगम के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार अंकुर, नव सृजन व कला मंच के अध्यक्ष मनमोहन सिंह ठाकुर ने की।
व्याख्यान के पूर्व संत गुरुघासी दास जी और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के तैल चित्र पर अगरबत्ती जलाकर पुष्प माला पहनाकर जयकारे लगाए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री रामदास अग्रवाल ने सामाजिक समरसता और सद्भाव पर अपनी विचार रखते हुए बोले – आजादी के बाद समाज में सामाजिक समरसता आयी है और अभी भी बदलाव की जरूरत है आने वाले समय मे सब एक साथ खड़े रहेंगे साहित्य से समाज मे समरसता जरूर आयेगी हर हाल में आयेगी। वही सारंगढ़ अंचल के युवा साहित्यकार पत्रकार लक्ष्मी नारायण लहरे ने सामाजिक समरसता और सद्भाव पर अपनी बात रखते हुए कहा कि बाबा संत गुरु घासी दास जी ने अपने संदेश में कहा है कि मनखे – मनखे एक समान, संविधान में भी सबको सम्मानता का अधिकार है फिर भी आज भी समाज मे भेद भाव व्याप्त है। आज भी ऊंच नीच की खाई की भरपाई नहीं हुई है आखिर समाज मे कब समरसता आएगी आज भी सतनामी जाति को सम्मान जनक दृष्टि से नहीं देखा जाता इस तरह उन्होंने कई घटना का उदाहरण प्रस्तुत कर अवगत कराएं ।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन साहित्यकार श्याम नारायण श्रीवास्तव ने किया। उक्त कार्यक्रम में रायगढ़ से नयी पीढ़ी की आवाज के सम्पादक भानु प्रताप मिश्र, राष्ट्रीय कवि संगम के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुमशुम सारंगढ़ से दिनेश दिव्य, दुर्गाशंकर ईजारदार जी, विजय ईजारदार, रामकुमार पटेल ‘यार’, जय देवांगन, एफ आर निराला (अधिवक्ता), रामसूरत भारद्वाज, जगत सिंह ठाकुर, श्रीमती सुखमति चैहान , सम्मेलाल कुर्रे, नन्दू सुमन जी कोसीर से पत्रकार व साहित्यकार लक्ष्मी नारायण लहरे साहिल, डॉ जितेंद्र मिश्रा, गीतकार सुनील एक्सरे बरमकेला से साखीगोपाल पण्डा, खरसिया से मनमोहन ठाकुर, हरप्रसाद ढेंढें व विशेष सहयोग भाई योगेश्वर चन्द्रम, विमल जांगड़े इत्यादि की उपस्थिति में कार्यक्रम का सफल आयोजन रहा।
सभी साहित्यकारों ने अपने अपने अनूठे अंदाज से कविता पाठ कर लोगों को आत्म मुग्ध किये तथा आगामी ऐसे ही नये विषय लेकर समाज को दिशा देने अन्य जगह भी किये जाने हैं इसकी जानकारी पूछने पर आनन्द सिंघनपुरी ने बताया।

*लक्ष्मी नारायण लहरे।

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