Chhattisgarh

लड़की के साथ दुष्कर्म, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाए आरोप।

रायपुर की घरौंदा संस्था की घटना

रायपुर। राजधानी में एक घिनौनी वारदात सामने आई है। मामला जिले की घरौंदा संस्था का है, जहां पिछले 5 साल से भर्ती एक बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। बच्ची मानसिक तौर पर बीमार बताई जा रही है, जिसे इलाज के लिए संस्था में भर्ती कराया गया था।
बता दें कि गोपालवाड़ी के घरौंदा संस्था में बेहतर उपचार के लिए बच्ची को भर्ती कराया था, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बच्ची के साथ ऐसा होगा। परिजनों ने इसकी शिकायत पहले तो सखी सेंटर में की, लेकिन बाद में मामले को थाने भेज दिया गया।
मानसिक तौर पर बीमार बच्चों का होता है इलाज बता दें कि कोपलवाणी संस्था की एक शाखा घरौंदा में मानसिक रूप से बीमार बच्चों को रखा जाता है और उन्हें बेहतर जीवन शैली सिखाई जाती है। बच्चों को स्वास्थ्य लाभ देने के साथ-साथ कुछ हुनर भी सिखाए जाते हैं, लेकिन इस घटना के बाद इस संस्था पर उंगली उठने लगी है और ऐसे में संस्था के संस्थापक कर्मचारी सहित संस्था से जुड़े लोग भी संदेह के घेरे में हैं, क्योंकि संस्था ने इस घटना को दबाने की कोशिश की थी।
पहले भी घरौंदा के वार्डन ने की थी मारपीट पीड़ित बच्ची ने बताया कि संस्था के डॉक्टर अजय साहू ने उसे पहले तो टॉफी दिया उसके बाद कमरे में कुछ काम के बहाने ले गया और वहां पर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। परिजनों का कहना है पहले भी घरौंदा के वार्डन और कर्मियों ने उनकी बच्ची के साथ मारपीट की थी, लेकिन संस्था के माफी मांगने और दोबारा ऐसी घटना न होने का आश्वासन दिलाने पर इसकी शिकायत थाने में नहीं की थी।
बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर हुआ खुलासा
परिजनों का आरोप है कि दिवाली के आस-पास उनकी बच्ची के साथ संस्था में ही काम करने वाले डॉक्टर ने दुष्कर्म किया है।परिजनों ने बताया कि जब बच्ची घरौंदा से 6 जनवरी को घर लौटी, तो अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद उसने इस बारे में अपनी मां को बताया, जिसके बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ।
मेडिकल रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा पुलिस ने संस्था में कार्यरत डॉ. अजय साहू के खिलाफ मामला दर्ज कर बच्ची को मेडिकल टेस्ट के लिए भेज दिया है।पुलिस ने बताया कि अभी तक मेडिकल रिपोर्ट नहीं आई है और न ही इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी हो सकी है। परिजनों को उम्मीद है कि पुलिस इस मामले में आरोपी खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी और उन्हें न्याय दिलाएगी।

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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