लहर कांग्रेस की, दावा भाजपा का ?

राजधानी में घमासान

बृजमोहन का विजय रथ निरंतर I
विकास ने उड़ाई, मूणत की नींद ?
त्रिकोणीय संघर्ष में फंसे श्रीचंद, सत्यनारायण
महासमुंद में निर्दलीय विमल चोपड़ा का दबदबा कायम . . . . . .
जोगी की जनता कांग्रेस ने कई क्षेत्रों में दोनों पार्टियों की उड़ाई नींद ?
रायपुर (भरत सोनी)। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन 2018 के तहत चुनावी सरगर्मियां तेज है। भाजपा के निरंतर 15 वर्षीय शासन के बाद जनता परिवर्तन के मूड में है। राज्य में विकास का डंका बजाने वाली भाजपा चौथी पारी खेलने एड़ी चोटी लगा रही है, वहीं आम जनता में परिवर्तन की लहर है। वर्तमान स्थिति देखकर 2008 की झलक दिखाई पड़ती है, जब परिवर्तन का नारा कॉग्रेस ने लगाया था लेकिन आपसी गुटबाज़ी के चलते काँग्रेस ने भाजपा को दूसरी, तीसरी पारी खेलने का मौका दिया। यदि यही स्थिति रही तो इतिहास दोहरा सकता है। वही विकल्पों का भी खतरा कांग्रेस के इरादों पर पानी फेर सकता है। जिसका पूरा फायदा भाजपा को मिलने के आसार हैं। तीसरे विकल्प के रूप जोगी की उपस्थिति को भी नकारा नहीं जा सकता, यदि स्थिति परिवर्तित होती है तो जोगी कुछ हद तक खेल बिगाड़ सकते हैं। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। लेकिन छत्तीसगढिया राज के लिए हुंकार भरने वाले इस महाभारत में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल होते नहीं दिखे। ऊंट किस करवट बैठता है, यह तो 11 दिसंबर को परिणामों की घोषणा से ही स्पष्ट होगा, लेकिन राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने दावों और प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

             पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के बाद आम जनता के समक्ष मतदान हेतु भाजपा- कांग्रेस के अलावा विकल्प का अभाव था। इस बार वोटर / जनता के पास आम आदमी पार्टी (आप) , जनता कांग्रेस (जे) व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रूप में निर्णायक विकल्प हैं। फिर भी कुछ विकल्प ऐसे भी हैं, जो जनता को भटकाव की ओर ले जाते हैं। “शेर के भेष में सियार” की कहावत भी चरितार्थ है। हालांकि आम जनता राजनीति के इन पैतरेबाजी से भी बखूबी परिचित है।बहरहाल, चुनावी महाभारत अपने अंतिम दौर में है। राजधानी की सबसे प्रतिष्ठा पूर्ण सीट रायपुर दक्षिण में प्रत्याशी चयन के भंवर में फंसी कांग्रेस, लहर के बावजूद भी रायपुर दक्षिण में फीकी पड़ती नजर आती है। लगातार 6 बार निर्वाचित हो चुके भाजपा के कद्दावर नेता सातवीं जीत की ओर अग्रसर हैं। वहीं पश्चिम में “सबका साथ, सबका विकास” के बावजूद विकास ने भाजपा के कद्दावर मंत्री की नाक में दम कर रखा है। वहीं रायपुर ग्रामीण में जोगी की जनता कांग्रेस के प्रत्याशी ओमप्रकाश देवांगन की उपस्थिति ने कांग्रेस प्रत्याशी की नींद उड़ा रखी है। जनता कांग्रेस प्रत्याशी ओमप्रकाश देवांगन व अमर गिदवानी की उपस्थिति ने रायपुर ग्रामीण व रायपुर उत्तर में त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति उत्पन्न कर मुकाबला रोमांचक बना दिया है।
चुनावी महाभारत में सबसे अहम किरदार निर्दलीय प्रत्याशी भी ,राज्य के कई क्षेत्रों में पूरे दम-खम से अपने प्रचार में लगे हैं। “कौन बनेगा विधायक” की प्रतियोगिता में ‘हम किसी से कम नहीं’ के तर्ज पर सभी अपने-अपने दावों पर संघर्ष कर रहे हैं। महासमुंद क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशियों में वर्तमान विधायक विमल चोपड़ा इस बार भी अपने क्षेत्र के लिए लोकप्रिय बने हुए हैं।
इस बार के चुनाव में निर्वाचन आयोग के डंडे के कहर से सभी प्रत्याशी स्तब्ध हैं। भविष्य में लगता है कि यदि निर्वाचन व्यवस्था इसी तरह रही तो ,चुनावी महाभारत के सैकड़ों महारथी महाभारत के पूर्व ही शरणागत हो जायेंगे। हो सकता है स्वच्छ राजनीति की आस में यह कदम कारगर साबित हों।

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