ग्राम पंचायत कुसमी में निर्विरोध पंचायत बॉडी का गठन, मीडिया का गदर्भ विलाप।

नगरीय निकाय चुनाव के बाद अब पूरा प्रशासन त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में जुट गया है। अब तक यही होता आया है कि चाहे विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा का अथवा नगरीय निकाय या फिर पंचायत चुनाव पांच वर्ष के लिए जनता के द्वारा जनता के लिए चुने जाने वाले पार्टी प्रतिनिधियों के द्वारा लोकतंत्र के इस महायज्ञ में “महाभोग” मुर्गा-बकरा की बलि देकर दारू की वितरण किया जाता है; इसके लिए लाखों रूपए पानी की तरह बहाए जाते हैं। लेकिन हमारे छत्तीसगढ़ में कई जनपद के अंतर्गत अनेक ग्राम पंचायत ऐसे हैं जहाँ के ग्रामीणों ने चुनाव में होने वाले फिजूलखर्ची को दरकिनार कर निर्विरोध चुनाव का रास्ता अख्तियार किया हुआ है। कबीरधाम जिलान्तर्गत सन 2015 की पंचायत स्तरीय चुनाव में चार जनपदों में 35 सरपंच व 3053 पंच निर्विरोध चुने गए थे। जो एक अनुकरणीय पहल थी। वहीं माह जुलाई सन 2017 में जशपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत झोलंगा में पंचायत के उप चुनाव में सरिता बाई का निर्विरोध निर्वाचन ग्रामीणों को रास नहीं आया और वह विवादों में चला गया…

बेमेतरा (hct)। मीडिया सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक वर्तमान में होने जा रहे त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों में छत्तीसगढ़ में पहली बार बेमेतरा जिलान्तर्गत कुसमी गांव के ग्रामीणों ने नामांकन से पहले ही सोमवार को गांव वालों ने एक राय बनाकर अपने लिए सरपंच-उपसरपंच और पंचो का चुनाव कर लिया है। आश्चर्य कि चाटुकार मीडिया इसे प्रदेश का पहला मामला बताकर “गदर्भ विलाप” कर रही हैं और सरकार उनके इस कारनामें को उपकृत करने के उद्देश्य से लाखों रुपए इनाम देने का विचार भी कर रहीं है…!

जिला मुख्यालय बेमेतरा से 12 किमी दूर ग्राम पंचायत कुसमी की कुल आबादी लगभग साढ़े तीन हजार है और मतदाताओं की संख्या करीबन चौबीस सौ वाले इस पंचायत में कुल 15 वार्ड हैं, चूँकि आबादी के हिसाब से एक बड़ा पंचायत होने के बाद जिस तरह से वहां के ग्रामीणों ने फिजूलखर्ची को नकारा है यह एक अच्छा सन्देश है; जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए, मगर सौम्य सरकार इसे अपनी उपलब्धि बताकर जिस तरह से मीडिया में हुंआ-हुंआ मचा रहा है नाकाबिले तारीफ है।

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